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विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बाजार में वापसी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों के चलते भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह अच्छी तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने करीब दो प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की। हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने कुछ मुनाफावसूली भी की।
शुक्रवार को निफ्टी 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,053 अंक पर बंद हुआ। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 308 अंक यानी 0.42 प्रतिशत चढ़कर 74,459 अंक पर पहुंच गया। पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी में दो प्रतिशत और सेंसेक्स में 1.83 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में शुरुआती नरमी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) और बैंक ऑफ जापान ने उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, महंगाई को लेकर इन केंद्रीय बैंकों के सतर्क रुख के कारण निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर फिलहाल अंकुश लगा रहा।
सुधरती आर्थिक परिस्थितियों का असर व्यापक बाजार में भी दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 में सप्ताह के दौरान 2.69 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 चार प्रतिशत चढ़ा।
सेक्टर के लिहाज से फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे ज्यादा मजबूती रही। कंपनियों के सकारात्मक तिमाही नतीजों से इन क्षेत्रों को समर्थन मिला। बॉन्ड यील्ड में नरमी से रियल एस्टेट शेयरों को फायदा हुआ। वहीं, कच्चे माल और अन्य इनपुट लागत में कमी की उम्मीद से मेटल, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही। इसके विपरीत सीमेंट और तेल एवं गैस क्षेत्र इस सप्ताह कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख सेक्टर रहे।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 6,304.67 करोड़ रुपये का निवेश किया। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 3,109.79 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी को तेजी के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
हालांकि, सप्ताह के अंत में पश्चिम एशिया में नए सिरे से बढ़े तनाव ने बाजार की धारणा पर असर डाला। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई और व्यापक बाजार में निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड सप्ताह के अंत तक करीब 117 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अब निवेशकों की नजर ओपेक प्लस (OPEC+) की आगामी समीक्षा पर है। इसके फैसले से तेल की आपूर्ति को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
आने वाले दिनों में घरेलू और वैश्विक आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) आंकड़ों से कारोबारी गतिविधियों की स्थिति का पता चलेगा। वहीं, अमेरिका के पीएमआई, रोजगार संबंधी आंकड़ों और मध्यावधि चुनावों के नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। घरेलू स्तर पर दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव को प्रभावित कर सकते हैं।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,175 से 23,285 अंक का दायरा तत्काल प्रतिरोध स्तर है, जबकि 22,750 से 22,800 अंक के बीच मजबूत सपोर्ट देखा जा रहा है। बैंक निफ्टी के लिए 55,150 अंक के ऊपर बंद होना तेजी के रुझान को और मजबूती दे सकता है। वहीं, 53,780 अंक इसका महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर बना हुआ है।