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चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में देश का राजकोषीय घाटा 7.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 16.96 लाख करोड़ रुपये के बजटीय लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत है। केंद्र सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर के दौरान केंद्र सरकार की राजस्व प्राप्तियां 17.57 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो पूरे साल के बजट अनुमान का 49.7 प्रतिशत है। इसमें शुद्ध कर राजस्व 12.76 लाख करोड़ रुपये और गैर-कर राजस्व 4.81 लाख करोड़ रुपये शामिल है।
शुद्ध कर राजस्व में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले सुधार दर्ज किया गया है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह पूरे साल के अनुमान का 44.5 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 43.3 प्रतिशत था। वहीं, गैर-कर राजस्व पिछले वर्ष के 4.7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 4.8 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इस दौरान केंद्र सरकार का कुल खर्च 25.5 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 23 लाख करोड़ रुपये था। सरकार ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय भी बढ़ाया है। राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश से जुड़ा पूंजीगत खर्च अप्रैल-सितंबर के दौरान बढ़कर 6.5 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 5.8 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह सरकार ने विकास और रोजगार सृजन को गति देने वाली परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाया है।
अप्रैल से सितंबर के बीच सरकार की कुल प्राप्तियां 18.35 लाख करोड़ रुपये रहीं। यह पूरे वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 50.3 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह अनुपात 49.5 प्रतिशत था।
दूसरी ओर, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की कीमतों पर पड़े असर के बीच सरकार का सब्सिडी खर्च भी बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में विभिन्न सब्सिडी पर 2.2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो पूरे साल के लिए निर्धारित 4.1 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का 54 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह अनुपात 53 प्रतिशत था।
सब्सिडी खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा खाद्य और उर्वरक मदों का रहा। खाद्य सब्सिडी पर 1.02 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि यूरिया सब्सिडी का खर्च 85,585 करोड़ रुपये रहा। पोषक तत्व आधारित उर्वरक सब्सिडी पर 33,664 करोड़ रुपये और पेट्रोलियम सब्सिडी पर 1,149 करोड़ रुपये खर्च हुए।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य हासिल किया था। अब वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे और घटाकर जीडीपी का 4.3 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। यह सरकार की राजकोषीय मजबूती और सरकारी उधारी को नियंत्रित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
राजकोषीय घाटे में कमी आने से सरकार की उधारी की जरूरत घटती है। इससे बैंकिंग व्यवस्था में निजी कंपनियों और उपभोक्ताओं को कर्ज देने के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध हो सकती है। साथ ही, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने से अर्थव्यवस्था में स्थिरता और विकास की संभावनाओं को मजबूती मिलती है।