अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने भारत के बुनियादी ढांचे और सतत विकास में अडानी समूह के योगदान को सराहाBy IANS Mon, 02 November 2026 04:33 PM

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प्रख्यात अर्थशास्त्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेफ्री डी. सैक्स ने सोमवार को भारत और वैश्विक स्तर पर सतत विकास के क्षेत्र में अडानी समूह तथा उसकी सामाजिक कल्याण एवं विकास इकाई अडानी फाउंडेशन की भूमिका की सराहना की।

कोलंबिया विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक और संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क के अध्यक्ष प्रोफेसर सैक्स ने अडानी समूह को भारत की बुनियादी ढांचा आधारित विकास यात्रा और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला प्रमुख समूह बताया।

वाराणसी में 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' विषय पर आयोजित विश्व संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अडानी समूह भारत में बदलाव और प्रगति के प्रमुख वाहकों में से एक है। उन्होंने देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार में समूह की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया।

प्रोफेसर सैक्स ने कारोबार में पारिवारिक नाम और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी अपने विचार रखे। अडानी समूह का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे व्यावसायिक संस्थान केवल किसी परिवार की पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि उनसे परिवार के मूल्य, विरासत और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन समुदायों के प्रति अपने योगदान पर भी ध्यान देना चाहिए, जिनके बीच वे काम करती हैं।

कॉरपोरेट जगत में सामाजिक जिम्मेदारी को व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाने की चुनौतियों को समझाते हुए सैक्स ने यूनिलीवर के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी पॉल पोलमैन के अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पोलमैन ने कंपनी को सामाजिक रूप से अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में प्रयास किए, लेकिन उन्हें शेयरधारकों, निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के विरोध का सामना करना पड़ा। इनका मुख्य जोर कंपनी के वित्तीय रिटर्न को प्राथमिकता देने पर था।

सैक्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में बढ़ते व्यावसायिक अवसरों के साथ उससे जुड़े संभावित खतरों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने को लेकर भी चिंता जताई।

अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोदेई की चेतावनियों और कंपनी की कथित बड़ी प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की तैयारी के बीच के अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने कहा कि एआई तकनीक से जुड़े संभावित गंभीर जोखिमों को समझना और उनका समाधान करना व्यावसायिक विस्तार की महत्वाकांक्षाओं से अधिक प्राथमिकता का विषय होना चाहिए।