21वीं सदी के पहले 25 सालों पर चित्रांगदा सिंह: इसी दौर में एक अभिनेत्री के रूप में मेरी जिंदगी की शुरुआत हुईBy Admin Thu, 25 December 2025 07:11 AM

मुंबई- अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने 21वीं सदी के पहले 25 वर्षों में बॉलीवुड के सफर को याद करते हुए इसे अपने जीवन का बेहद अहम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यही वह दौर है, जब एक अभिनेत्री के रूप में उनकी यात्रा शुरू हुई।

21वीं सदी के पहले 25 वर्षों पर विचार करते हुए चित्रांगदा ने आईएएनएस से कहा, “मैंने इसे कभी पहले क्वार्टर के रूप में नहीं देखा था, लेकिन यही वह समय है जब एक अभिनेत्री के रूप में मेरी जिंदगी शुरू हुई। इसलिए यह मेरे लिए निश्चित तौर पर बहुत खास है। ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ मेरी पहली फिल्म थी।”

उन्होंने अपने काम को याद करते हुए ‘इंकार’ जैसी फिल्मों का जिक्र किया, जो मीटू मूवमेंट से पहले आई थीं, साथ ही ‘थ्री इडियट्स’, ‘दंगल’, ‘सुल्तान’ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ जैसी आइकॉनिक फिल्मों को भी अपने करियर का हिस्सा बताया।

चित्रांगदा ने कहा, “मैंने ‘इंकार’ जैसी कई फिल्में कीं, जो मीटू से पहले के दौर में आई थीं। मुझे लगता है कि मेरा काफी काम अपने समय से पहले का था। अगर मैं कुछ सबसे यादगार फिल्मों की बात करूं, तो ‘थ्री इडियट्स’ निश्चित रूप से उनमें शामिल है। फिर ‘दंगल’, ‘सुल्तान’ और हाल में ‘होमबाउंड’, जो काफी आगे तक गई। ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ भी किसी हद तक भारत से जुड़ी एक बड़ी फिल्म रही।”

उनका मानना है कि इस दौर में देखने और चुनने के लिए काम की कोई कमी नहीं रही। उन्होंने कहा, “विशाल भारद्वाज का काम शानदार रहा है, अभिषेक चौबे भी बहुत अच्छे हैं। दूसरी तरफ स्पाई यूनिवर्स है, ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी फिल्में हैं। मुझे लगता है कि विकल्प ही विकल्प हैं। यह सफर वाकई अद्भुत रहा है। भले ही आज के काम को लेकर हम आलोचनात्मक और कभी-कभी नकारात्मक हो जाते हैं, लेकिन पीछे मुड़कर देखें तो गर्व करने के लिए बहुत कुछ है।”

सिनेमा के विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “कहानी कहने का तरीका बदल गया है। मैं नहीं जानती कि इसे विकास कहें या नहीं, लेकिन यह पहले से अलग जरूर है। तकनीकी तौर पर हम काफी बेहतर हुए हैं, लेकिन कई बार तकनीक कहानी कहने में बाधा भी बन जाती है और जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करती है।”

हालांकि, उन्होंने हालिया फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ जगहों पर तकनीक और एआई का इस्तेमाल कहानी को और मजबूत करता है। “इसके बावजूद, मुझे लगता है कि हाल के समय में ‘धुरंधर’ जैसी फिल्में ऐसी हैं, जहां तकनीक, एआई और बाकी चीजें बेहद खूबसूरती से कहानी के साथ जुड़ीं। आगे बढ़ते हुए मुझे लगता है कि हम समय के साथ और बेहतर होंगे।”

इसके साथ ही चित्रांगदा ने बिना तकनीक के सहारे बनी कुछ ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फिल्मों की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि तकनीक और एआई के बिना भी हम लेखन पर ज्यादा समय और मेहनत लगाएंगे, क्योंकि कहानी और लेखन हमेशा राजा रहेगा। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ मेरे लिए बहुत पाथ-ब्रेकिंग फिल्म थी। ‘रंग दे बसंती’ और ‘लगान’ भी बेहद महत्वपूर्ण फिल्में रही हैं। कुल मिलाकर, ऐसी कई फिल्में हैं जिन्हें याद किया जाएगा।”

 

With inputs from IANS