
नई दिल्ली: एक OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ 'घुसखोर पंडित' को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है और अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुँच गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सीरीज़ की कहानी और कुछ डायलॉग एक खास समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं, जबकि प्रोड्यूसर्स का कहना है कि यह एक काल्पनिक व्यंग्य है और अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में आता है।
वेब सीरीज़ किस बारे में है?
'घुसखोर पंडित' को एक सामाजिक-राजनीतिक ड्रामा के तौर पर पेश किया गया है जो एक काल्पनिक शहर के धार्मिक और राजनीतिक सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार को दिखाता है। मुख्य किरदार एक पुजारी है जिसे रिश्वत लेते और सत्ता में बैठे लोगों के साथ मिलीभगत करते हुए दिखाया गया है। यह सीरीज़ धर्म, राजनीति और प्रशासन के बीच सांठगांठ पर एक तीखा व्यंग्य करती है। प्रोड्यूसर्स का दावा है कि इसका मकसद किसी खास समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि सिस्टम के अंदर के भ्रष्टाचार को उजागर करना है।
विवाद का कारण क्या है?
विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि सीरीज़ का टाइटल और किरदारों का चित्रण ब्राह्मण समुदाय को बदनाम करता है। सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद, कुछ समूहों ने कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया और दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिका में विवादित दृश्यों को हटाने या सीरीज़ की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सीरीज़ में इस्तेमाल की गई भाषा और कुछ दृश्य धार्मिक प्रतीकों का अपमान करते हैं, जिससे सामाजिक अशांति फैल सकती है। दूसरी ओर, प्रोड्यूसर्स और कुछ कलाकारों ने बयान जारी कर कहा है कि यह एक काल्पनिक रचना है और इसे किसी भी असली समुदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
कोर्ट में क्या हुआ?
शुरुआती सुनवाई के दौरान, दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और OTT प्लेटफॉर्म और प्रोड्यूसर्स से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सीरीज़ पर कोई तत्काल रोक नहीं लगाई है, लेकिन कहा है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और सामाजिक ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन ज़रूरी है।
आगे क्या होगा?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला OTT कंटेंट की सीमाओं और सेंसरशिप के मुद्दे पर एक बड़ी बहस छेड़ सकता है। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या विवादित दृश्यों में बदलाव करने की ज़रूरत है। फिलहाल, "घुसखोर पंडित" को लेकर बहस सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जारी है, और सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं।