‘जय हिंद’ से हुई परवरिश, फौजी बेटी बरखा सिंह के लिए देशभक्ति जीवन का हिस्साBy Admin Sat, 15 August 2026 04:32 PM

Photo: IANS

अभिनेत्री बरखा सिंह के लिए देशभक्ति कोई ऐसी भावना नहीं है जिसे उन्हें अलग से महसूस या प्रदर्शित करना पड़े। नौसेना अधिकारी की बेटी के रूप में पली-बढ़ी बरखा का कहना है कि सैन्य माहौल में बचपन बीतने के कारण देशभक्ति उनके जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन गई।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आईएएनएस से बातचीत में बरखा ने कहा कि सैन्य परिवार में पले-बढ़े होने ने बचपन से ही देश और सेना के प्रति उनके नजरिए को गहराई से प्रभावित किया। उनके मुताबिक, उनके घर में सामान्य अभिवादन ‘हैलो’ से ज्यादा ‘जय हिंद’ सुनने को मिलता था।

बरखा ने कहा, “मेरे लिए देशभक्ति जीवन जीने का एक तरीका है। मुझे देशभक्त होने के लिए अलग से कुछ करने या सोचने की जरूरत नहीं पड़ती। हम ‘हैलो’ की जगह ‘जय हिंद’ सुनते हुए बड़े हुए हैं। ऐसी छोटी-छोटी चीजों ने इतनी गहराई से देशभक्ति की भावना पैदा की कि अब यह मेरे लिए जीवन का हिस्सा है।”

उनके पिता भारतीय नौसेना में अधिकारी रहे हैं और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बरखा ने अपने ‘फौजी बच्चे’ के रूप में बिताए बचपन को याद करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले तबादले उनके लिए परेशानी से ज्यादा रोमांच और नई यादें लेकर आते थे।

उन्होंने बताया कि हर तबादले के साथ नया शहर, नया स्कूल और नए दोस्त मिलते थे। जहां सामान्य बच्चों को स्कूल में एक या ज्यादा से ज्यादा दो बार ‘पहला दिन’ देखने को मिलता है, वहीं सैन्य परिवारों के बच्चों के लिए ऐसे कई पहले दिन होते हैं। बरखा के अनुसार, उस समय यह थोड़ा मुश्किल लगता था, लेकिन इसी अनुभव ने उन्हें ज्यादा आत्मविश्वासी और लोगों से घुलने-मिलने वाला बनाया।

उन्होंने कहा कि हर तबादले के साथ सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि कॉलोनी, दोस्तों के समूह और यहां तक कि स्कूल बस भी बदल जाती थी। हर जगह एक नई शुरुआत होती थी और वह अनुभव उनके लिए हमेशा रोमांचक रहा।

सैन्य जीवन ने बरखा के व्यक्तित्व में अनुशासन भी गहराई से विकसित किया। उन्होंने बताया कि उनके घर में समय की पाबंदी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थी। गर्मी की छुट्टियां भी देर तक सोने के लिए नहीं होती थीं। सुबह पौने छह बजे उठना, छह या सवा छह बजे तक स्विमिंग पूल पहुंचना, तैराकी सीखना, घुड़सवारी करना और हर काम तय समय पर पूरा करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

बरखा ने कहा कि सैन्य परिवार से मिली यही आदत आज भी उनके पेशेवर और निजी जीवन में दिखाई देती है। समय पर काम करना और हर चीज तय समय के अनुसार पूरा करने को लेकर उनकी गंभीरता कभी-कभी उनकी टीम के लिए परेशानी का कारण भी बन जाती है, लेकिन वह मानती हैं कि यह आदत सैन्य माहौल में पली-बढ़ी परवरिश का ही नतीजा है।

अभिनेत्री के लिए स्वतंत्रता दिवस का महत्व अब और भी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता को आज भी उनकी कॉलोनी में एक पूर्व सैनिक के रूप में काफी सम्मान मिलता है और हर वर्ष उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के लिए बुलाया जाता है।

बरखा ने कहा कि अपने पिता को तिरंगा फहराते और आसपास के लोगों से सम्मान पाते देखना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उनके मुताबिक, यह सम्मान उनके पिता की वर्षों की सेवा की एक खूबसूरत याद दिलाता है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बरखा ने लोगों से सेना के जवानों और अधिकारियों को याद करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में लगे थलसेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों तथा अधिकारियों को अपनी शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं में याद करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी पूर्व सैनिक से मुलाकात हो तो सिर्फ इतना कहना कि “आपकी सेवा के लिए धन्यवाद” एक छोटा-सा कदम जरूर है, लेकिन उस व्यक्ति के लिए इसका महत्व बहुत बड़ा हो सकता है।

बाल कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली बरखा सिंह फिल्मों, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम कर चुकी हैं। वह ‘मुझसे फ्रैंडशिप करोगे’, ‘सम्राट एंड कंपनी’, ‘इंजीनियरिंग गर्ल्स’, ‘प्लीज फाइंड अटैच्ड’, ‘मसाबा मसाबा’, ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज!’ और ‘साइलेंस... कैन यू हियर इट?’ जैसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही हैं।
 

 

With inputs from IANS