
रांची — योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) के रांची स्थित आश्रम में शनिवार को गुरुदेव परमहंस योगानन्द की 74वीं महासमाधि जयंती के अवसर पर पारंपरिक साधु भंडारे का आयोजन किया गया। विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु और चर्चित पुस्तक Autobiography of a Yogi के लेखक परमहंस योगानन्द ने 7 मार्च 1952 को महासमाधि ग्रहण की थी।
इस अवसर को स्मरण करते हुए आश्रम में हर वर्ष आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सेवा कार्यों का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थानों से जुड़े संतों और संन्यासियों को आमंत्रित कर उनका आदर-सत्कार किया जाता है।
इस वर्ष रांची तथा आसपास के क्षेत्रों के कई आश्रमों और आध्यात्मिक संगठनों से लगभग 50 साधु-संत और साध्वियाँ इस आयोजन में शामिल हुए। अतिथियों के लिए विशेष भंडारे की व्यवस्था की गई और उन्हें सम्मान स्वरूप शॉल, मालाएँ, वस्त्र तथा प्रतीकात्मक सम्मान राशि भेंट की गई।
कार्यक्रम के दौरान वाईएसएस के संन्यासियों ने स्वयं साधु-संतों को भोजन परोसकर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में संतों के सम्मान की भावना को जीवंत किया।
इस आयोजन में रामकृष्ण मिशन (तुपुदाना और मोराबादी), भारत सेवाश्रम संघ, श्री श्री आनंदमयी संघ, मातृकाश्रम, चिन्मय आश्रम, महर्षि मेही आश्रम तथा राम मंदिर सहित कई प्रतिष्ठित आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
रांची स्थित यह आश्रम ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1917 में यहीं पर परमहंस योगानन्द ने पहला योगदा सत्संग ब्रह्मचर्य विद्यालय स्थापित किया था, जहां आध्यात्मिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षण पद्धति के साथ जोड़ा गया था।
इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया सेवा, आध्यात्मिक एकता और भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के संदेश को निरंतर आगे बढ़ा रही है।