
रांची: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब पूरे देश में आम लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है। झारखंड में LPG गैस की भारी कमी ने घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर होटल और रेस्टोरेंट मालिकों तक, सभी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी रांची समेत राज्य के ज़्यादातर ज़िलों में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग खाली सिलेंडर लेकर एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह साफ़ जानकारी नहीं मिल पा रही है कि गैस की सप्लाई कब शुरू होगी।
हालांकि तेल कंपनियां प्रशासन को भरोसा दिला रही हैं कि गैस सप्लाई में कोई कमी नहीं है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात इसके उलट दिख रहे हैं। गैस एजेंसियों का कहना है कि उन्हें डिमांड से बहुत कम सिलेंडर मिल रहे हैं, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पूरी तरह से गड़बड़ा गया है।
झारखंड में कुल लगभग 592 गैस एजेंसियां काम करती हैं, और लगभग सभी एजेंसियों के पास 100 से 200 सिलेंडर का बैकलॉग है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है। राज्य में कुल 67.27 लाख LPG कंज्यूमर हैं, जिसमें इंडियन ऑयल के 37.83 लाख, भारत पेट्रोलियम के 11.68 लाख और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 17.77 लाख कंज्यूमर शामिल हैं। तीनों ही कंपनियों के कंज्यूमर को ज़रूरी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं।
हालात को देखते हुए, तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम के कमर्शियल गैस सिलेंडर की नॉर्मल बिक्री पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। उन्होंने निर्देश दिया है कि कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ़ हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज और दूसरी ज़रूरी सरकारी संस्थाओं को ही दिए जाएं। इस फैसले का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट के बिजनेस पर पड़ा है। रांची समेत राज्य के कई शहरों के होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि उनके पास सिर्फ़ एक से दो दिन की गैस बची है। अगर बुधवार तक हालात नॉर्मल नहीं हुए, तो कई होटल और रेस्टोरेंट बंद करने पड़ सकते हैं।
शादी और इवेंट के सीजन में कमर्शियल गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की फिक्स्ड कीमत करीब ₹1,800 है, लेकिन रांची, बोकारो और धनबाद समेत कई जगहों पर गैस डिलीवरी करने वाले लोग ₹150 से ₹600 ज़्यादा में सिलेंडर देने का दावा कर रहे हैं।
होटल और रेस्टोरेंट चलाने वालों का कहना है कि अगर गैस सप्लाई जल्द नॉर्मल नहीं हुई, तो बिज़नेस पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है, और लोगों को खाने-पीने की चीज़ें देने में मुश्किलें आ सकती हैं। प्रशासन और तेल कंपनियाँ अभी हालात नॉर्मल करने का वादा कर रही हैं, लेकिन कस्टमर्स को राहत मिलने में थोड़ा समय लग सकता है।