
रांची: रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति ने राज्य हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड द्वारा जारी नई अधिसूचना पर कड़ी आपत्ति जताई है। समिति के सदस्यों का कहना है कि बोर्ड ने झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए एकतरफा रूप से नई समिति के गठन की अधिसूचना जारी की है, जो पूरी तरह गलत है।
समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि अदालत के निर्देशों और कानूनी प्रावधानों का सम्मान नहीं किया जाता है, तो वे अदालत का रुख करने के लिए मजबूर होंगे। समिति के सदस्यों राजेश गडोडिया, सौरभ चौधरी और संदीप जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि समिति को पूरा अवसर प्रदान करते हुए कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके बावजूद, उनका आरोप है कि राज्य हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड ने समिति के विचार सुने बिना और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना एक नई समिति के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। यह न्यायालय के आदेश की भावना का उल्लंघन है। समिति के सदस्यों ने कहा कि बोर्ड की कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा थी और इससे मंदिर प्रबंधन में शामिल लोगों में असंतोष बढ़ गया है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी प्रशासनिक या धार्मिक संस्था के गठन में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना कोई निर्णय लिया जाता है, तो इससे विवाद और गहरा जाएगा। पहाड़ी मंदिर विकास समिति ने कहा है कि यदि न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, तो समिति के पास कानूनी कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। समिति ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वह उच्च न्यायालय में पुनः अपील करेगी। धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।