
रांची: रांची की सड़कों पर ना सायरन का शोर ना ही कोई काफिला। सामान्य दिनों की तरह चल रही थी राजधानी की ट्रैफिक। लेकिन इसी दौरान राज्य के मुख्यमंत्री अपने आवास से प्रोजेक्ट बिल्डिंग तक का सफर ते किया और किसी को पता भी नहीं चल। यह बात तब साने आई जब मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट बिल्डिंग की गेट पर एक सफेद रंग की फोरचूनर गाड़ी से बिना किसी सुरक्षा घेरे के खुद से ही गाड़ी की गेट खोलकर निकलते देखे गए। मुख्यमंत्री को अचानक अकेले गाड़ी से उतरता देख सचिवालय गेट पर उपस्थित अधिकारी-कर्मचारी हलकान हो गए। मुख्यमंत्री सीधे गाड़ी से उतरकर अपने कक्ष की ओर चले गए। मुख्यमंत्री के साथ सिर्फ अभिषेक प्रसाद पिंटू और एक सुरक्षा कर्मी अजय कुमार थे। अमूमन दर्जनों गाड़ियों के सायरन और सुरक्षाकर्मियों के घेरे में रहने वाले मुख्यमंत्री को महज एक साधारण गाड़ी से मंत्रालय आते देख वहां मौजूद हर शख्स अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहा था.
रांची के ट्रैफिक व्यवस्था की हकीकत का लिया जायजा
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री का यह कदम कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी योजना का हिस्सा था. बताया जा रहा है कि सीएम सोरेन रांची शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सड़कों की स्थिति और आम जनता को रोजाना होने वाली समस्याओं का जमीनी स्तर पर आकलन करना चाहते थे. वे यह देखना चाहते थे कि बिना वीआईपी मूवमेंट के शहर की रफ्तार कैसी रहती है और आम नागरिक किन चुनौतियों से जूझते हैं. जैसे ही मुख्यमंत्री की इकलौती गाड़ी प्रोजेक्ट भवन के गेट पर रुकी, वहां तैनात सुरक्षाकर्मी और अधिकारी सन्न रह गए. आम तौर पर मुख्यमंत्री के आने से पहले पूरा रूट क्लियर कराया जाता है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं था. मंत्रालय के गलियारों में चर्चा रही कि मुख्यमंत्री ने सादगी की मिसाल पेश करते हुए सीधे अपने कक्ष की ओर रुख किया. हालांकि सुरक्षा के लिहाज से यह एक बड़ा रिस्क माना जा रहा था, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मुख्यमंत्री पूरी तरह सहज नजर आए. उनके साथ न तो सुरक्षाकर्मियों का बड़ा दल था और न ही पायलट गाड़ियां.
वित्त मंत्री के स्वास्थ्य की जानकारी ली
इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची के एक निजी अस्पताल मे इलजरत वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से मिलकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। वित्त मंत्री से मिलने के बाद मुख्यमंत्री अपने आवास पहुंचे और कुछ ही मिनट के बाद बिना कुछ कहे, बिना लाव-लश्कर के सचिवालय के लिए निकाल पड़े।