
रामगढ़ जिला समाहरणालय के सभागार में सोमवार को जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने की। इस दौरान जिले में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। पिछली बैठक के निर्णयों की प्रगति पर भी चर्चा हुई और कई गंभीर मुद्दों पर गहन मंथन किया गया।
बैठक में सांसद मनीष जायसवाल और उपायुक्त ऋतुराज ने जनहित के मामलों पर कड़ा रुख अपनाया। अवैध खनन का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। सांसद ने जिला खनन पदाधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि अवैध कोयला, बालू और पत्थर खनन से सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, साथ ही नदियों के इंटेक वेल और पुलों की सुरक्षा भी खतरे में है। इस पर उपायुक्त ने तुरंत विशेष टास्क फोर्स गठित करने और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
कौशल विकास योजनाओं में केवल कागजी प्रगति दिखाने वाली एजेंसियों को चेतावनी दी गई। स्पष्ट कहा गया कि युवाओं के रोजगार के साथ समझौता नहीं होगा और स्थानीय कंपनियों के साथ तालमेल बनाकर उन्हें वास्तविक रोजगार से जोड़ा जाएगा। आरईओ विभाग को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में तेजी लाने और ठेकेदारों की निगरानी कड़ी करने के निर्देश दिए गए।
सामाजिक सुरक्षा के तहत छूटे हुए लाभार्थियों को जोड़ने के लिए विशेष कैंप लगाने और पेंशन योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। कृषि और पशुपालन विभाग को निर्देश दिया गया कि वे योजनाओं से जुड़े कैंपों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करें।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए सांसद ने कहा कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी क्लीनिकों में भेजने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। अस्पतालों के 500 मीटर के दायरे में निजी क्लीनिकों के संचालन पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए।
शिक्षा के क्षेत्र में खराब परीक्षा परिणाम पर नाराजगी जताई गई। शिक्षकों की जवाबदेही तय करने और जहां शिक्षक नहीं हैं, वहां कंपनियों के सहयोग से वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी चिंता का विषय रही। जिले में 500 से अधिक केंद्र अभी भी निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं, जबकि अब तक केवल 71 भवन ही बन पाए हैं। सभी केंद्रों के लिए पक्के भवन, पेयजल और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
पेयजल व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगी। पूर्व बैठक के निर्देशों पर रिपोर्ट न देने पर नाराजगी जताई गई। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं और गलत आंकड़े प्रस्तुत करने पर जनप्रतिनिधियों ने विरोध जताया। गर्मी को देखते हुए पंचायत स्तर पर सर्वे कर वास्तविक स्थिति जानने और जलापूर्ति योजनाओं को जल्द चालू करने का निर्देश दिया गया। इस संबंध में उपायुक्त स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया।
सड़क और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। चरही मोड़ और कुजू के पास एनएच पर फ्लाईओवर निर्माण, चुटूपालू घाटी में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट्स को चालू करने और एनएचआई के ब्लैक स्पॉट्स पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि बैठक का उद्देश्य यही है कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।
बैठक में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत कई महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गई। जनप्रतिनिधियों ने भी क्षेत्र से जुड़े मुद्दे उठाए, जिन पर संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इस बैठक में बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, मांडू विधायक निर्मल महतो, रामगढ़ विधायक ममता देवी, जिला परिषद अध्यक्ष सुधा देवी, नगर परिषद अध्यक्ष कुसुमलता कुमारी, उप विकास आयुक्त आशीष अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।