
सुनील सिंह
रांची: बंगाल चुनाव का परिणाम आ चुका है. भाजपा की शानदार जीत हुई है. इस जीत के कई मायने और कई कारण हैं. लेकिन इस जीत के पीछे भाजपा की रणनीति व रणनीतिकार कौन थे. इनके बारे में जानना भी जरूरी है. कई लोग पर्दे के पीछे और फ्रंट पर अलग-अलग लोग मोर्चा संभाल रहे थे. जिन्होंने पूरी बाजी पलट दी और ममता की करारी हार हुई.
पर्दे के पीछे रणनीति बनाने में जिनकी सबसे बड़ी भूमिका रही, जिसकी वजह से भाजपा को इतनी बड़ी जीत मिली और कमल खिला है. इसके लिए पिछले 6 महीने से मोदी और अमित शाह के विश्वासी और संगठन के माहिर खिलाड़ी जमीन पर मेहनत कर रहे थे.
मुख्य रणनीतिकारों में महामंत्री सुनील बंसल, केंद्रीय मंत्री और संगठन के जानकारी भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान, गुजरात भाजपा के अध्यक्ष और मोदी अमित शाह के भरोसेमंद सीआर पाटील, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री विप्लव देव, रवि त्रिपाठी, प्रदीप भंडारी, आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय सहित एक दर्जन लोग भाजपा की रणनीति बनाने और इसे मूर्त रूप देने में लग रहे.
बिहार चुनाव के तुरंत बाद मिशन बंगाल को लेकर करीब 200 नेताओं की फौज बंगाल के विभिन्न जिलों में उतर चुकी थी. मिशन बंगाल के अभियान में 6 महीने पहले जिनको जिम्मेदारी दी गई थी. उनमें सीआर पाटील के नेतृत्व में उत्तर बंगाल (अनंत नारायण मिश्रा), राढ़ (पवन साईं और धन सिंह रावत), हावड़ा (पवन राणा और संजय भाटिया), मेदिनीपुर (जेपीएस राठौर), दक्षिण 24 परगना (एम सिद्धार्थन और सीटी रवि), सिलीगुड़ी (अरुण बिन्नादी ,राजीव कुमार ओझा)।
गृहमंत्री अमित शाह लगातार मॉनीटरिंग कर रहे थे और दिशा निर्देश दे रहे थे. हर हफ्ते मीटिंग कर रहे थे और लगातार बंगाल का दौरा कर रहे थे. बांग्ला भाषी कई नेताओं को भी साथ में लगाया गया था. ताकि भाषा की समस्या न रहे. प्रधानमंत्री मोदी अमित शाह से फीडबैक लेते थे.
फ्रंट के मोर्चे पर भी कई नेता काम कर रहे थे. मोदी और अमित शाह के बाद स्थानीय स्तर पर शुभेदु अधिकारी ममता बनर्जी के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक बने हुए थे. पिछले पांच वर्षों तक वह ममता शासन के खिलाफ संघर्ष कर भाजपा को जमीन स्तर पर पहुंचाया. जीत मैं उनकी बड़ी भूमिका रही. अधिकारी मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार हैं. यही मुख्यमंत्री बनेंगे.