झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरी पत्नी को नहीं मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का लाभBy Mid Time Bureau Tue, 08 September 2026 04:33 PM

झारखंड हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की दूसरी शादी और अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी पहली पत्नी के जीवित रहते बिना विभागीय अनुमति के दूसरी शादी करता है, तो कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह फैसला एक दिवंगत पंचायत सेवक की कथित दूसरी पत्नी की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।

कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी को पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने से पहले सक्षम अधिकारी से लिखित अनुमति लेना जरूरी है। इस मामले में कर्मचारी ने दूसरी शादी से पहले विभागीय अनुमति नहीं ली थी। याचिकाकर्ता की ओर से संथाली जनजाति की प्रथा का हवाला देते हुए दूसरी शादी को वैध बताया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में लागू नियमों का पालन करना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि प्रथागत कानून का तर्क सेवा नियमों की बाध्यता को खत्म नहीं कर सकता।

मामला पंचायत सेवक बरनवास मालतु से जुड़ा है, जिनकी सेवाकाल के दौरान 11 जुलाई 2011 को मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद कथित दूसरी पत्नी ने अनुकंपा नियुक्ति और सेवानिवृत्ति लाभ में हिस्सेदारी की मांग की थी। अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज होने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने सेवानिवृत्ति लाभों में पहली पत्नी और दूसरी पत्नी के नाबालिग बेटे को ग्रेच्युटी का हिस्सा देने का आदेश दिया, लेकिन दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ दायर अपील को भी हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दिया।

यानी हाईकोर्ट के इस फैसले में साफ किया गया है कि सरकारी कर्मचारी द्वारा बिना विभागीय अनुमति की गई दूसरी शादी की स्थिति में दूसरी पत्नी को सेवाकाल में मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलेगा।