लाल रोशनी से जगमगाया रांची का लोक भवन, डिस्लेक्सिया पर दिया जागरूकता का संदेशBy Mid Time Bureau Mon, 26 October 2026 12:19 PM

रांची में रविवार को लोक भवन, जिसे पहले राजभवन के नाम से जाना जाता था, लाल रोशनी से जगमगा उठा। अंतरराष्ट्रीय डिस्लेक्सिया जागरूकता माह के तहत चलाए जा रहे ‘#GoRed’ अभियान के जरिए लोगों को बच्चों की सीखने से जुड़ी कठिनाइयों के प्रति जागरूक करने की कोशिश की गई।

इस पहल का मकसद सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत को लाल रंग से रोशन करना नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना है। अभियान के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि हर बच्चे के सीखने और चीजों को समझने का तरीका अलग होता है। ऐसे में बच्चों को कमजोर समझने के बजाय उनकी क्षमताओं को पहचानना और उन्हें सही सहयोग देना जरूरी है।

क्या है डिस्लेक्सिया और कैसे होती है इसकी पहचान?

रिम्स के मनोचिकित्सा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और रिनपास के प्रभारी निदेशक रह चुके डॉ. अशोक प्रसाद के मुताबिक, डिस्लेक्सिया मस्तिष्क के विकास और भाषा संबंधी प्रक्रियाओं से जुड़ी एक विशिष्ट अधिगम कठिनाई है। इससे प्रभावित बच्चों को शब्दों को पहचानने, पढ़ने, सही वर्तनी समझने और लिखने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, डिस्लेक्सिया का किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता से सीधा संबंध नहीं है। इस कठिनाई से जूझने वाले बच्चे भी रचनात्मक, प्रतिभाशाली और जीवन में सफल हो सकते हैं।

आखिर जागरूकता के लिए लाल रंग ही क्यों?

दरअसल, स्कूलों में गलत जवाबों और वर्तनी की गलतियों को चिह्नित करने के लिए अक्सर लाल पेन का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों के लिए लाल रंग कई बार गलतियों और असफलता की याद दिलाता है। ‘#GoRed’ अभियान इसी सोच को बदलने की कोशिश कर रहा है। इस पहल में लाल रंग को जागरूकता, आत्मविश्वास और स्वीकार्यता के प्रतीक के रूप में पेश किया गया है।

इस अभियान की प्रेरणा ऑस्ट्रेलिया में 2015 में शुरू हुए ‘Code Read’ अभियान से मिली। इसके बाद 2019 से ‘Go Red for Dyslexia’ एक वैश्विक जागरूकता अभियान के रूप में आगे बढ़ा। अक्टूबर महीने को दुनियाभर में डिस्लेक्सिया जागरूकता माह के तौर पर मनाया जाता है। भारत में भी राष्ट्रपति भवन समेत कई ऐतिहासिक और सरकारी इमारतों को लाल रोशनी से रोशन कर इस विषय पर जागरूकता का संदेश दिया जा चुका है।

रांची के लोक भवन को लाल रोशनी से सजाने की यह पहल अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को बच्चों की सीखने संबंधी कठिनाइयों को समझने के लिए प्रेरित करती है। समय रहते डिस्लेक्सिया की पहचान, विशेषज्ञों की सलाह और समावेशी शिक्षा के जरिए बच्चों को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

यह अभियान एक अहम संदेश देता है कि हर बच्चा एक ही तरीके से नहीं सीखता, लेकिन हर बच्चे को शिक्षा पाने, अपनी प्रतिभा निखारने और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का समान अधिकार है।