
रांची: झारखंड प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता कैलाश यादव ने निर्वाचन आयोग पर एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर भ्रामक जानकारी देने और एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल चुनाव आयोग का हलफनामा तथ्यों को लेकर शब्दों का खेल है। इससे आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
कैलाश यादव ने कहा कि फॉर्म-6 से जुड़े नए घोषणा पत्र को लेकर आयोग के बयानों में विरोधाभास सामने आया है। उनके अनुसार, पहले आयोग ने दावा किया था कि घोषणा पत्र को सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है, जबकि बाद में शीर्ष अदालत ने इस दावे का खंडन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अब यह कह रहा है कि घोषणा पत्र अलग है और फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि ऑनलाइन फॉर्म-6 जमा करने के लिए इस घोषणा पत्र को भरना अनिवार्य था।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि 26 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग ने घोषणा पत्र को फॉर्म-6 के साथ संलग्न बताया था, जबकि अब इसे फॉर्म-6 का हिस्सा मानने से इनकार किया जा रहा है। उन्होंने इसे आयोग के रुख में विरोधाभास बताते हुए एसआईआर से संबंधित निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
यादव ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मनमाने ढंग से फैसले लेने के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। उन्होंने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने ईसीआईनेट (ECINET) के माध्यम से मतदाता सूची पर नियंत्रण के कथित केंद्रीकरण तथा निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) के अधिकारों को दरकिनार किए जाने के मुद्दे पर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के हलफनामे में तथ्यों को स्पष्ट करने के बजाय शब्दों के माध्यम से भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई है। यादव ने उम्मीद जताई कि सर्वोच्च न्यायालय सभी तथ्यों की समीक्षा कर उचित निर्णय लेगा।
राजद प्रवक्ता ने एसआईआर रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को राष्ट्रव्यापी रूप दिया जाएगा। यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर जनांदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती।