राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर रघुवर दास ने उठाए सवाल, सबूत पेश करने की दी नसीहतBy Mid Time Bureau Thu, 29 October 2026 04:50 PM

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान और विपक्षी दलों की राजनीति पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता बैलेट यानी मतपत्र से होकर गुजरता है, न कि बंदूक या अराजकता के जरिए। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन इसके समर्थन में ठोस प्रमाण भी सामने आने चाहिए।

‘सिर्फ आरोपों से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता’

रघुवर दास ने अपने बयान में कहा कि भारत का लोकतांत्रिक इतिहास इस बात का उदाहरण है कि जनता अपने मताधिकार के जरिए सरकार चुनती और बदलती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार का अंत भी चुनाव के माध्यम से हुआ था।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान के साथ कम्युनिस्ट और वामपंथी संगठन भी खड़े हैं और व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रहे हैं। दास के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों का समाधान संवैधानिक संस्थाओं के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल नारेबाजी और आरोपों के आधार पर जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता।

शिक्षा सुधार आंदोलन और फंडिंग पर भी उठाए सवाल

रघुवर दास ने एक आंदोलन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इसकी शुरुआत शिक्षा सुधार के मुद्दे पर हुई थी, लेकिन बाद में यह कांग्रेस और वामपंथी संगठनों के करीब पहुंच गया। उन्होंने आंदोलन के एजेंडे और फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स का जिक्र करते हुए उन्होंने इसके पीछे विदेशी शक्तियों की साजिश होने का दावा किया। हालांकि, उनके इस दावे की पुष्टि करने वाले स्वतंत्र प्रमाण उनके बयान में प्रस्तुत नहीं किए गए।

उन्होंने वर्ष 1962 का उल्लेख करते हुए कम्युनिस्टों पर चीन का समर्थन करने का आरोप भी लगाया। साथ ही कहा कि नक्सलवाद और उग्रवादी हिंसा ने देश के कई हिस्सों में विकास तथा शांति के सामने चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई से उग्रवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है।

SIR और मोदी सरकार का भी किया जिक्र

अपने बयान में रघुवर दास ने शाहीन बाग आंदोलन और ‘चौकीदार चोर है’ नारे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक चुनौतियों का सामना धैर्य और दूरदर्शिता के साथ किया है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का समर्थन करते हुए दावा किया कि इससे देश की संप्रभुता मजबूत हुई है और घुसपैठियों की पहचान करने में मदद मिली है।

दास ने भविष्यवाणी की कि राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ का नारा भी पहले के राजनीतिक नारों की तरह प्रभाव खो देगा। उन्होंने मोदी सरकार को जनकल्याणकारी बताते हुए उसका बचाव किया।

लोकतंत्र में बैलेट की भूमिका पर जोर

रघुवर दास ने अपने बयान के अंत में कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष, दोनों की जवाबदेही जनता के प्रति होती है। उनके मुताबिक, भारत में सत्ता परिवर्तन का वैध माध्यम चुनाव है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को हिंसा तथा अराजकता से दूर रखा जाना चाहिए।

उन्होंने संविधान, जनता के विश्वास और मताधिकार को भारतीय लोकतंत्र की बुनियादी ताकत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।