डहरे सोहराय में उमड़ा कुड़मी समाज, परंपराओं के बीच भाषा और राजकीय छुट्टी की मांग तेजBy Mid Time Bureau Wed, 04 November 2026 07:02 PM

Ranchi: रांची में बुधवार को डहरे सोहराय के आयोजन के साथ कुड़मी समाज ने अपनी लोकपरंपराओं का रंग बिखेरा। मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकली यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, रीति-रिवाज और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिली। वृहद झारखंड कला संस्कृति के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में रांची जिले के सभी 14 प्रखंडों से कुड़मी समुदाय के लोग शामिल हुए।

इस आयोजन की तैयारी करीब एक महीने से की जा रही थी। इसका उद्देश्य शहर के लोगों को कुड़मी समाज की लोकपरंपराओं और गांवों से जुड़ी जीवनशैली से परिचित कराना था। डहरे सोहराय खेती-किसानी से जुड़ा महापर्व है। इसमें कृषि कार्यों में सहयोग करने वाले पशुओं, प्रकृति और पूर्वजों के प्रति सम्मान जताया जाता है।

इस बार आयोजन में परंपराओं के साथ समाज की मांगों को भी प्रमुखता मिली। कुड़मी भाषा को संथाली की तरह सम्मान और पहचान देने की मांग उठाई गई। आयोजकों ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखने की बात कही। इसके अलावा टुसू, करम और सोहराय जैसे पारंपरिक पर्वों पर राजकीय अवकाश घोषित करने की मांग भी उठाने की तैयारी है।

आयोजकों के मुताबिक, पूर्वजों से मिली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भाषा और पर्वों को उचित पहचान मिलना जरूरी है। इसी उद्देश्य से डहरे सोहराय के आयोजन के जरिए इन मांगों को भी सामने रखा गया।

रांची में आज का यह आयोजन लोकपरंपराओं के प्रदर्शन के साथ कुड़मी समाज की भाषा और पर्वों को सम्मान दिलाने की आवाज भी बना।