कच्छ में ‘रोड टू हेवन’ पर सुकून के पल बिताते दिखे सनी देओलBy Admin Tue, 10 February 2026 01:13 PM

मुंबई। अभिनेता सनी देओल ने अपनी यात्रा के दौरान बिताए एक शांत और आत्ममंथन भरे पल की झलक साझा की है। उन्होंने कच्छ से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है।

सनी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह अपनी कार के सहारे खड़े होकर विशाल जलराशि को निहारते नजर आ रहे हैं। आसमान में उभरते सूर्योदय या ढलते सूरज के कोमल रंग इस दृश्य को और भी आकर्षक बना रहे हैं।

उन्होंने इस पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “रोड टू हेवन. कच्छ।” हाल ही में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की सफलता का आनंद ले रहे सनी ने इस वीडियो के जरिए कच्छ के शांत और सुकून भरे माहौल को दर्शाया।

‘बॉर्डर 2’ वर्ष 1971 के युद्ध और वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म है। इस फिल्म को गुलशन कुमार और टी-सीरीज ने जे.पी. दत्ता की जे.पी. फिल्म्स के सहयोग से प्रस्तुत किया है। फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जे.पी. दत्ता और निधि दत्ता ने किया है, जबकि इसका निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है।

गौरतलब है कि जे.पी. दत्ता की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बॉर्डर’ वर्ष 1997 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में सनी देओल, जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना, पुनीत इस्सर, सुदेश बेरी और कुलभूषण खरबंदा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। वहीं, तब्बू, पूजा भट्ट, राखी गुलजार, शरबानी मुखर्जी, सपना बेदी और राजीव गोस्वामी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे।

सनी देओल अब अपनी अगली फिल्म ‘लाहौर 1947’ में नजर आएंगे, जो 13 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में पहली बार सनी देओल, निर्देशक राजकुमार संतोषी और निर्माता आमिर खान साथ काम कर रहे हैं।

फिल्म को लेकर आमिर खान ने एक बयान में कहा, “यह धरमजी की पसंदीदा स्क्रिप्ट्स में से एक थी और मुझे खुशी है कि वह इस फिल्म को देख पाए।”

इस फिल्म में शबाना आजमी, प्रीति जिंटा और करण देओल भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। हाल की ब्लॉकबस्टर सफलताओं के बाद ‘लाहौर 1947’ सनी देओल का अगला बड़ा प्रोजेक्ट है।

यह फिल्म वर्ष 1947 के भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो उपमहाद्वीप के इतिहास का सबसे उथल-पुथल भरा दौर रहा है। इस फिल्म के जरिए सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी ‘घायल’ और ‘दामिनी’ जैसी फिल्मों के बाद फिर साथ नजर आएगी।

बताया जा रहा है कि फिल्म की कहानी असगर वजाहत के प्रसिद्ध नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या, ओ जम्याइ नइ’ से प्रेरित है। यह कहानी विभाजन की त्रासदी को बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की बजाय मानवीय रिश्तों और भावनात्मक संघर्ष के नजरिए से दिखाती है।

कहानी एक हिंदू परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे लाहौर से भारत पलायन करना पड़ता है। भारत आने के बाद उन्हें एक हवेली आवंटित की जाती है, जो पहले एक मुस्लिम परिवार की थी। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चलता है कि उस हवेली में एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला अब भी रह रही है।

इसके बाद कहानी पहचान, बिछड़ने के दर्द, सहअस्तित्व और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे संवेदनशील विषयों को भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है।

 

With inputs from IANS