
खरमास (Kharmas 2026) 15 मार्च, 2026 को शुरू होगा और 14 अप्रैल, 2026 तक रहेगा। सूर्य के मीन राशि में आने की वजह से यह बहुत ज़रूरी है। इस महीने में, सूर्य की एनर्जी कम हो जाती है, जिससे शुभ काम (शादी, गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार) नहीं हो पाते हैं। यह समय आध्यात्मिक साधना, दान और आध्यात्मिक चिंतन के लिए बहुत अच्छा है।
खरमास के दौरान क्या करें
दान: ज़रूरतमंदों को अनाज, कपड़े, गुड़, घी, हरी दाल और चना दान करें; इससे खास पुण्य मिलता है।
प्रार्थना: भगवान सूर्य और विष्णु की पूजा करें। सूर्य को अर्घ्य दें और मंत्रों (जैसे गायत्री मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र) का जाप करें।
सात्विक जीवन: इस समय सात्विक खाना खाएं, ज़मीन पर सोएं और अनुशासित जीवन जिएं।
तीर्थयात्रा: पवित्र नदियों में स्नान करें और धार्मिक स्थलों पर जाएं।
खरमास में क्या न करें
शुभ काम: शादी, सगाई, तिलक, गृह प्रवेश, मुंडन या जनेऊ जैसे शुभ काम न करें।
नई खरीदारी: नई गाड़ी, ज़मीन, घर या कोई महंगी चीज़ खरीदने से बचें।
नया बिज़नेस: नया बिज़नेस शुरू करने या कोई बड़ा इन्वेस्टमेंट करने से बचें, क्योंकि इसमें रुकावटें आ सकती हैं।
तामसिक खाना: मांस, मछली और शराब से बचें।
झगड़े: किसी भी तरह की बहस से बचें।
खरमास क्यों ज़रूरी है?
ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में जाता है, तो उसकी एनर्जी और असर कमज़ोर हो जाता है, जो गधे की धीमी रफ़्तार से जुड़ा है। इस दौरान बृहस्पति का कम असर शुभ कामों को अशुभ बना देता है। इसलिए, यह महीना बाहरी सेलिब्रेशन के बजाय अंदरूनी शुद्धि और आत्म-साक्षात्कार के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।