
मुंबई। भारत ने हर्बल दवाओं के क्षेत्र में अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करते हुए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक गुणवत्ता प्रोटोकॉल के साथ जोड़कर हर्बल दवाओं की वैश्विक स्वीकृति सुनिश्चित करने का संकल्प भारत ने एक आयोजन के दौरान दोहराया।
यह चार दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) फॉर हर्बल मेडिसिन्स पर केंद्रित रही, जिसे केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ- दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (WHO-SEARO) ने संयुक्त रूप से आरआरएपी-केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, मुंबई में आयोजित किया।
कार्यशाला में भूटान, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के 19 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया, साथ ही भारत के अग्रणी विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
यह आयोजन प्रशिक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच साबित हुआ, जिसने वैश्विक हर्बल औषधि गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने की दिशा में अहम योगदान दिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर रबिनारायण आचार्य ने कहा कि भारत पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक गुणवत्ता प्रोटोकॉल को मिलाकर हर्बल दवाओं की वैश्विक स्वीकृति का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. पवन गोडटवार (WHO-SEARO) ने हर्बल दवाओं के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की स्थापना में भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया।
यह कार्यशाला क्षेत्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, विशेषकर WHO-GMP, GHPP और GACP दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए।
प्रतिभागियों को भारत के हर्बल औषधि और फार्मास्युटिकल क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञों द्वारा 11 तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया।
मुख्य विषयों में WHO-GMP दिशानिर्देश, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, गुड हर्बल प्रोसेसिंग प्रैक्टिसेज (GHPP), गुड एग्रीकल्चरल एंड कलेक्शन प्रैक्टिसेज (GACP) और आधुनिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल शामिल थे।
व्यावहारिक प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में, प्रतिनिधियों ने इमामी के WHO-GMP प्रमाणित विनिर्माण संयंत्र और ज़ंडू फाउंडेशन फॉर हेल्थकेयर के फार्म का दौरा किया, जहां उन्हें गुणवत्ता मानकों और फार्म-टू-फार्मा उत्कृष्टता का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।
आयुष मंत्रालय, डब्ल्यूएचओ के सहयोग से, भारत के हर्बल औषधि मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने के प्रयास लगातार जारी रखे हुए है।
With inputs from IANS