
नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी परिस्थिति में अवैध खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपायों में ढील को लेकर फैल रही अफवाहें भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के रुख का स्पष्ट समर्थन किया है और अरावली के वैज्ञानिक व सतत प्रबंधन पर जोर देते हुए अवैध खनन पर सख्त रोक लगाने की बात कही है।
प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के प्रमुख अंश:
**आईएएनएस:** अरावली को बचाने का मुद्दा अब सिर्फ अरावली क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में इस पर चर्चा हो रही है। आप इस पर क्या कहना चाहेंगे?
**भूपेंद्र यादव:** सरकार अरावली को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके संरक्षण के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ चुका है। खनन के संदर्भ में अरावली और अरावली पर्वतों की स्पष्ट परिभाषा तय की गई है। खनन से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या अवैध खनन को रोकने की है। जब तक एक वैज्ञानिक प्रबंधन योजना तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसी भी नए खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस योजना को तैयार करने की जिम्मेदारी आईसीएफआरई (ICFRE) को सौंपी गई है। सरकार इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल है।
**आईएएनएस:** क्या सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में खनन को लेकर किसी तरह की छूट दी है?
**भूपेंद्र यादव:** सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह की छूट नहीं दी है। उसने दो महत्वपूर्ण बातें कही हैं। पहली, मंत्रालय की ‘ग्रीन अरावली परियोजना’ को मान्यता दी है। दूसरी, आईसीएफआरई को यह जिम्मेदारी दी है कि व्यापक योजना तैयार होने तक कोई नया खनन नहीं होगा। इस योजना के तहत अरावली पर्वतों और पर्वतमाला की पहचान की जाएगी, उनकी पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किया जाएगा और उसके बाद ही किसी गतिविधि पर विचार होगा। इसका उद्देश्य अवैध खनन को रोकना और वैज्ञानिक तरीके से सतत खनन सुनिश्चित करना है।
**आईएएनएस:** क्या पहली बार अरावली में 100 मीटर ऊंचाई तक खनन की अनुमति दी जा रही है?
**भूपेंद्र यादव:** यह 100 मीटर तक खनन की अनुमति का मामला नहीं है। मुद्दा अरावली पर्वतों की पहचान का है। इसकी गणना केवल ऊंचाई से नहीं, बल्कि जमीन के स्तर से की जाएगी। यदि पहाड़ 200 मीटर ऊंचे हैं, तो उनके बीच की 500 मीटर की भूमि को भी अरावली पर्वतमाला का हिस्सा माना जाएगा। संरक्षित क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे और लगभग 90 प्रतिशत अरावली क्षेत्र खनन से बाहर रहेगा।
**आईएएनएस:** यह परिभाषा ऊपर से की जाएगी या नीचे से?
**भूपेंद्र यादव:** यह परिभाषा जमीन के सबसे निचले स्तर से ऊपर की ओर की जाएगी और संबंधित जिले की भू-वैज्ञानिक संरचना के आधार पर तय होगी।
**आईएएनएस:** सुप्रीम कोर्ट का इस पर क्या रुख रहा है? क्या यह कांग्रेस शासन के समय से जुड़ा मामला है?
**भूपेंद्र यादव:** अवैध खनन को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एफएसआई, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और सीईसी के साथ एक संयुक्त समिति बनाई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी।
**आईएएनएस:** कांग्रेस शासन के दौरान अरावली में खनन की स्थिति क्या थी?
**भूपेंद्र यादव:** उस समय बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ था, इसी वजह से लोग अदालत गए थे। यह याचिका भी उसी दौर की है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अरावली के संरक्षण के लिए सतत, वैज्ञानिक, पर्यावरण-अनुकूल और सीमित उपाय लागू किए जाएंगे।
**आईएएनएस:** वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि खनन के कारण 31 पहाड़ पूरी तरह खत्म हो गए। इस पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है?
**भूपेंद्र यादव:** इसी कारण हर जिले के लिए एक अलग प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
**आईएएनएस:** यह दावा किया जा रहा है कि चित्तौड़गढ़ और माधोपुर को नई प्रबंधन योजना से बाहर रखा जा रहा है। इसमें कितनी सच्चाई है?
**भूपेंद्र यादव:** अरावली का कोई भी हिस्सा बाहर नहीं रखा जा रहा है। सभी क्षेत्रों को योजना में शामिल किया जाएगा।
**आईएएनएस:** आपने कहा कि अरावली को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। क्या इसके पीछे विदेशी फंडिंग या एनजीओ का हाथ है?
**भूपेंद्र यादव:** जो लोग झूठ फैलाना चाहते हैं, वे ऐसा करेंगे। लेकिन वे सफल नहीं हो रहे हैं। जनता अब सच्चाई जान चुकी है।
**आईएएनएस:** क्या यह गुजरात में नर्मदा परियोजना के समय हुए विरोध जैसा मामला है?
**भूपेंद्र यादव:** यह कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक हताशा से पैदा हुआ झूठ है। जनता वास्तविकता समझ चुकी है।
**आईएएनएस:** पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कभी कुडनकुलम परियोजना के विरोध के पीछे एनजीओ और विदेशी एजेंसियों का जिक्र किया था। क्या अरावली का विरोध भी उसी तरह का है?
**भूपेंद्र यादव:** अरावली के विरोधी भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें पूरी तरह विफल हो चुकी हैं।
—आईएएनएस