
इंदौर - मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भगिरथपुरा क्षेत्र में कथित रूप से दूषित पानी पीने से बीते कुछ दिनों में बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के मामले में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। इस गंभीर घटना को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दो नगर निगम अधिकारियों को निलंबित करने और एक लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) अधिकारी को सेवा से हटाने के आदेश दिए हैं।
यह कार्रवाई मंगलवार देर रात की गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बयान में कहा, “इंदौर के भगिरथपुरा की घटना अत्यंत दुखद है। जोनल अधिकारी सलीग्राम सिटोले और सहायक अभियंता योगेश जोशी को निलंबित किया गया है। वहीं, पीएचई के अधीक्षण अभियंता शुभम श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है।”
इससे पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उपचाराधीन मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और यह भी आश्वासन दिया कि सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। पहले से किए गए चिकित्सा खर्च की राशि भी लौटाई जाएगी।
मंगलवार तक अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान तीन लोगों की मौत हुई थी, लेकिन बुधवार को यह संख्या बढ़कर आठ हो गई, एक अधिकारी ने बताया।
स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोमवार देर रात अस्पतालों का दौरा कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें नि:शुल्क उपचार का भरोसा दिलाया।
यह बीमारी फैलने का मामला 25 दिसंबर के बाद सामने आया, जब स्थानीय निवासियों ने नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए जा रहे पानी में असामान्य स्वाद और दुर्गंध की शिकायत की थी। इसके बाद शहर में पेयजल की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार शाम कुछ अस्पतालों का दौरा करने के बाद इस त्रासदी के लिए इंदौर नगर निगम आयुक्त को जिम्मेदार ठहराया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इंदौर जिला कांग्रेस इकाई द्वारा इंदौर नगर निगम (आईएमसी) और महापौर पुष्यमित्रा भार्गव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने की संभावना है। जीतू पटवारी ने मंगलवार को कहा कि वह जिला कांग्रेस अध्यक्ष से थाने में एफआईआर दर्ज कराने को कहेंगे।
पटवारी ने कहा, “यह नगर निगम की पूरी तरह से विफलता है। अगर नालियों का पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल जाए तो उल्टी, दस्त और पीलिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं, लेकिन इससे मौत नहीं होती। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट पानी की पाइपलाइन में हुई है, जिसकी गंभीर जांच की जरूरत है।”
With inuts from IANS