
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने अब मतदान केंद्र स्थापित करने के लिए बहुमंजिला आवासीय परिसरों की पहचान का कार्य अपने स्वतंत्र तंत्र के जरिए करने का फैसला किया है।
यह निर्णय जिला मजिस्ट्रेटों (डीएम), जो कि जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) भी होते हैं, द्वारा 300 या उससे अधिक मतदाताओं वाले आवासीय परिसरों की पहचान करने में लगातार विफल रहने के बाद लिया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “डीएम और डीईओ आयोग को चिन्हित आवासीय परिसरों की सूची सौंपने के लिए तय की गई लगातार दो समय-सीमाओं को पूरा करने में असफल रहे हैं। 31 दिसंबर अंतिम समय-सीमा थी, लेकिन तब तक भी डीईओ की ओर से सूचियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसी कारण आयोग ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए मतदान केंद्र स्थापित करने हेतु आवासीय परिसरों की पहचान के लिए अपना स्वतंत्र तंत्र लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विस्तृत योजना बहुत जल्द घोषित की जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी आवासीय परिसर की ओनर्स एसोसिएशन परिसर के भीतर मतदान केंद्र स्थापित करने की अनुमति नहीं देती है, तो निर्वाचन आयोग पास के किसी उपयुक्त स्थान पर अस्थायी मतदान केंद्र और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, “ऐसी स्थिति में अस्थायी मतदान केंद्र ऐसे स्थान पर बनाए जाएंगे, जो पास-पास स्थित एक से अधिक आवासीय परिसरों के मतदाताओं की जरूरतों को पूरा कर सकें।”
वर्तमान योजना के अनुसार, ऐसे मतदान केंद्र मुख्य रूप से कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिलों के आसपास के टाउनशिप, पश्चिम बर्धमान जिले के औद्योगिक नगर आसनसोल और दुर्गापुर तथा दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में स्थापित किए जाएंगे।
इस बीच बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिला और राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर पार्टी की आपत्तियां सामने रखीं।
बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि आवासीय परिसरों के भीतर मतदान केंद्र स्थापित करने के अपने पहले के फैसले से निर्वाचन आयोग के पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।
With inputs from IANS