
वॉशिंगटन — एक प्रमुख वित्तीय दैनिक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की विशाल उपभोक्ता आबादी के सहारे अर्थव्यवस्था को संभालने की रणनीति अपना रहे हैं, ऐसे समय में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापारिक संबंधों पर दबाव बना रहे हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रणनीति शुरुआती स्तर पर सफल होती दिख रही है, जिससे भारत को 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ — जो किसी भी अमेरिकी व्यापारिक साझेदार पर लगाए गए सबसे अधिक शुल्कों में शामिल हैं — के बावजूद बातचीत में अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद मिली है।
भारत की राजधानी में उपभोक्ता खर्च पर सरकारी उपायों का असर दिखने लगा है। 22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र श्रेय दीक्षित ने बताया कि सितंबर में बिक्री करों में बड़ी कटौती के बाद उनके परिवार ने दूसरी कार खरीदने का फैसला किया। दीक्षित ने अखबार से कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि हमें मनचाही कार कम कीमत पर मिल गई।”
निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत, भारत की अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च का हिस्सा करीब तीन-पांचवां है, जिससे नई दिल्ली को अमेरिकी दबाव से अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षा मिलती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तुलना में भी अमेरिका की कृपा पर कम निर्भर है। इन देशों ने व्यापारिक तनाव कम करने के लिए अमेरिका में बड़े निवेश प्रस्ताव दिए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में अमेरिका के व्यापार घाटे का हवाला देते हुए भारत पर पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और बाद में रियायती रूसी तेल की भारत की खरीद को सीमित करने के उद्देश्य से इसमें 25 प्रतिशत की और बढ़ोतरी की। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहले ही घरेलू मांग को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा चुका था।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, सरकार ने सालाना लगभग 13,300 डॉलर तक की आय वालों के लिए आयकर दायित्व समाप्त कर दिया, जबकि केंद्रीय बैंक ने कई बार ब्याज दरों में कटौती की।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले साल अक्टूबर में दीवाली के आसपास प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से स्थानीय उत्पाद खरीदने और अपनी खरीदारी को सोशल मीडिया पर साझा करने का आग्रह किया था। इसके बाद जुलाई–सितंबर तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसमें केंद्रीय बैंक ने मजबूत उपभोक्ता मांग और सरकारी खर्च को प्रमुख कारण बताया।
अखबार के अनुसार, भारत ने कृषि क्षेत्र की सुरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिकी डेयरी और एथेनॉल उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने के अमेरिकी दबाव का विरोध किया है। भारत में कृषि क्षेत्र 25 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
अमेरिकी बाजार से सीधे जुड़े कुछ क्षेत्रों को नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन अर्थशास्त्री बिस्वजीत धर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, “कुल मिलाकर हालात सामान्य कारोबार जैसे ही रहेंगे।” टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिका को निर्यात में गिरावट आई है, हालांकि रुपये में पिछले साल आई कमजोरी की मदद से भारत ने नए बाजारों की तलाश भी की है।
भारत ने अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने के लिए अपने परमाणु क्षेत्र में निजी निवेश की अनुमति देने और बीमा क्षेत्र को पूरी तरह विदेशी निवेशकों के लिए खोलने जैसे सुधार भी किए हैं।
अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, हालांकि केंद्रीय बैंक ने पूरे साल के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। विश्व बैंक का कहना है कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है और जल्द ही जापान को पीछे छोड़ सकता है।
With inputs from IANS