मतदाता सूची में कथित हेरफेर के आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई वापस लेने की बंगाल सरकार की अपील ईसीआई ने खारिज कीBy Admin Sun, 18 January 2026 07:59 AM

कोलकाता: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार ने दो विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण में कथित गड़बड़ी के आरोपों का सामना कर रहे चार निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ जारी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया था। इन कार्रवाइयों में निलंबन और प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के निर्देश शामिल थे।

शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के माध्यम से ईसीआई को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया था, जिसमें इन चार अधिकारियों—दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और दो सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ)—के खिलाफ पहले जारी अनुशासनात्मक आदेशों को वापस लेने की मांग की गई थी।

हालांकि, शनिवार को नई दिल्ली स्थित ईसीआई मुख्यालय ने सीईओ कार्यालय को स्पष्ट कर दिया कि संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेट, जो जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) भी हैं, आयोग के पहले के आदेश के अनुसार इन चारों अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की।

जिन चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है, उनमें दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी देबोत्तम दत्ता चौधरी और उसी क्षेत्र के सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी तथागत मंडल शामिल हैं।

अन्य दो अधिकारी पूर्व मिदनापुर जिले के मोयना विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी बिप्लब सरकार और वहां के सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी सुदीप्त दास हैं।

गौरतलब है कि अगस्त पिछले वर्ष ईसीआई मुख्यालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को इन चारों निर्वाचन अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। हालांकि, राज्य सरकार ने आदेश को आंशिक रूप से लागू किया। अधिकारियों को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

इसके अतिरिक्त, एक संविदा पर कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर को भी सेवा से हटा दिया गया था।

इस महीने की शुरुआत में ईसीआई ने दक्षिण 24 परगना और पूर्व मिदनापुर के जिला मजिस्ट्रेटों को एक बार फिर इन चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। लेकिन इससे पहले कि दोनों जिलों के निर्वाचन अधिकारी एफआईआर की प्रक्रिया शुरू करते, राज्य सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने का अनुरोध भेज दिया।

इन अधिकारियों पर मतदाता सूची से छेड़छाड़ करने का आरोप है। इसी आरोप के आधार पर ईसीआई ने उनके निलंबन और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।

इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईसीआई की कार्रवाई की आलोचना करते हुए आयोग को “भाजपा का बंधुआ मजदूर” तक करार दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी सरकार अपने कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

 

With inputs from IANS