जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकवाद विरोधी अभियान फिर शुरूBy Admin Mon, 19 January 2026 05:49 AM

जम्मू - जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चत्रू क्षेत्र के सोनार गांव में आतंकवाद विरोधी अभियान सोमवार को फिर से शुरू कर दिया गया। सीमित दृश्यता के कारण सुरक्षा बलों ने यह अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया था।

18 जनवरी को प्रारंभिक घेराबंदी एवं तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन—सीएएसओ) के दौरान आतंकियों और संयुक्त सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान आतंकियों ने ग्रेनेड फेंके और गोलीबारी की, जिसमें सेना के आठ जवान घायल हो गए।

घायलों में से तीन जवानों को एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए भेजा गया, जबकि पांच का इलाज स्थानीय अस्पताल में किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश जवान ग्रेनेड विस्फोट में छर्रे लगने से घायल हुए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पूरी रात अभियान रोके जाने के बाद सोमवार सुबह संयुक्त बलों ने ऊपरी इलाकों में छिपे आतंकियों की तलाश फिर शुरू कर दी। घना जंगल, खड़ी ढलानें और कठिन भूभाग अभियान में बाधा बने हुए हैं, जिससे दृश्यता और आवाजाही प्रभावित हो रही है।

सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टीमें ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से इलाके की सघन तलाशी ले रही हैं। साथ ही, कड़ा सुरक्षा घेरा बनाए रखा गया है, ताकि आतंकी भाग न सकें।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े दो से तीन आतंकी इलाके में फंसे हुए हैं। सोमवार को पहले उजाले के साथ अभियान दोबारा शुरू किया गया, हालांकि अब तक आतंकियों से कोई नया संपर्क नहीं हुआ है।

‘ऑपरेशन त्राशी-1’ नाम से चल रहे इस अभियान के बारे में सेना की नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कोर ने रविवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि सोनार क्षेत्र (चत्रू के उत्तर-पूर्व) में चल रहे संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों का आतंकियों से संपर्क हुआ था। यह अभियान जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभ्यास के तहत चलाया जा रहा है।

सेना ने कहा, “घेराबंदी को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और नागरिक प्रशासन व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखा गया है।” सेना ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और दुर्गम इलाके में दुश्मन की गोलीबारी का सामना करते हुए जवानों के पेशेवर रवैये और दृढ़ संकल्प की सराहना भी की।

यह इस वर्ष जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच तीसरी मुठभेड़ है। इससे पहले 7 और 13 जनवरी को कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र के कहोग और नाजोटे जंगलों में मुठभेड़ हुई थी।

पिछले वर्ष 15 दिसंबर को उधमपुर जिले के मजालता क्षेत्र के सोन गांव में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक पुलिस अधिकारी शहीद हो गया था। उस दौरान घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकी भागने में सफल रहे थे।

दिसंबर में जम्मू क्षेत्र के वन क्षेत्रों में लगभग तीन दर्जन आतंकियों को खदेड़ने के लिए बड़े पैमाने पर आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया गया था। इसके बाद से सुरक्षा बलों ने अभियान और तेज कर दिए हैं, खासकर गणतंत्र दिवस से पहले, ताकि शांतिपूर्ण समारोह सुनिश्चित किए जा सकें। अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाएं हैं कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर जम्मू-कश्मीर में और आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहे हैं।

जम्मू संभाग के पहाड़ी जिले—कठुआ, पुंछ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा, उधमपुर और रियासी—सुरक्षा बलों के विशेष रडार पर हैं। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकी इन इलाकों के घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

8 जनवरी को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में जम्मू संभाग के पहाड़ी जिलों में आतंकियों की मौजूदगी पर विस्तृत चर्चा हुई।

गृह मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि समन्वित, सतत और खुफिया-आधारित अभियानों के जरिए पहाड़ी इलाकों से आतंकियों का पूरी तरह सफाया किया जाए और नियंत्रण रेखा (एलओसी) तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से शून्य घुसपैठ सुनिश्चित की जाए।

जम्मू-कश्मीर में एलओसी की लंबाई 740 किलोमीटर और अंतरराष्ट्रीय सीमा 240 किलोमीटर है। एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना करती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सीमा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पास है।

 

With inputs from IANS