
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों के दौरान पेश किए गए केंद्रीय बजट परिवर्तन और नीतिगत सुधारों का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। इन बजटों ने एमएसएमई और स्टार्टअप्स सहित उद्योगों के लिए कारोबार सुगमता सुनिश्चित की है, साथ ही आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
मोदी सरकार के पहले केंद्रीय बजट 2014-15 में व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया गया था, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 3 लाख रुपये तय की गई। इसके साथ ही धारा 80सी के तहत निवेश सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दिया गया।
वैश्विक पूंजी आकर्षित करने और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से रक्षा और बीमा क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत की गई। सरकार ने बड़े शहरों के उपग्रह नगरों के रूप में और मध्यम आकार के शहरों के आधुनिकीकरण के जरिए देशभर में 100 स्मार्ट सिटी विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की, जिसके लिए शुरुआती तौर पर 7,060 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
उस बजट में ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के तहत ग्रामीण सड़कों पर विशेष जोर दिया गया और नए हवाई अड्डों के विकास के साथ-साथ पीपीपी मॉडल के व्यापक उपयोग का प्रस्ताव रखा गया।
यदि हम केंद्रीय बजट 2025-26 पर नजर डालें, तो स्पष्ट होता है कि सरकार ने न केवल अपने वादों को निभाया है, बल्कि सुधारों की गति को और तेज किया है। आयकर विधेयक, 2025, भारत की छह दशक पुरानी प्रत्यक्ष कर व्यवस्था को बदलने की दिशा में एक अहम कदम है, जिसका उद्देश्य निवेशकों का भरोसा, करदाताओं को राहत और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन बनाना है।
कर सुधारों के तहत कॉरपोरेट टैक्स में उन कंपनियों के लिए 22 प्रतिशत की दर तय की गई है, जो किसी विशेष छूट या कटौती का लाभ नहीं लेतीं, जबकि नई विनिर्माण कंपनियों के लिए निर्धारित अवधि तक 15 प्रतिशत की रियायती दर लागू की गई है। व्यक्तिगत कराधान में नई कर व्यवस्था के तहत उदार स्लैब, कम दरें और बढ़ी हुई छूट का प्रावधान किया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार, 12 लाख रुपये तक की आय (मानक कटौती 75,000 रुपये के कारण वेतनभोगी करदाताओं के लिए प्रभावी रूप से 12.75 लाख रुपये) पर कोई कर देय नहीं है। इससे वेतनभोगी परिवारों की बचत, उपभोग और डिस्पोजेबल आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 100 कम उत्पादकता वाले जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को लाभ मिलने का प्रावधान किया गया है। साथ ही दालों में आत्मनिर्भरता मिशन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है।
क्रेडिट गारंटी सीमा को 5 करोड़ रुपये से दोगुना कर 10 करोड़ रुपये किया गया है, राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन की शुरुआत की गई है और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देने तथा रोजगार सृजन के लिए सीमा शुल्क में बड़े पैमाने पर छूट दी गई है।
बजट 2025-26 में निजी अनुसंधान एवं विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये, न्यूक्लियर एसएमआर मिशन के लिए 20,000 करोड़ रुपये, शिक्षा के लिए 500 करोड़ रुपये का एआई सेंटर और तकनीकी नेतृत्व विकसित करने के लिए 50,000 अटल टिंकरिंग लैब्स जैसी कई अहम घोषणाएं भी की गईं।
वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे को घटाकर 4.4 प्रतिशत करने का लक्ष्य, बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना, कानूनों के अपराधीकरण को खत्म करने के लिए जन विश्वास 2.0 और कर व अनुपालन से जुड़े बड़े ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुधार इस बात को दर्शाते हैं कि पीएम मोदी सरकार 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।
With inputs from IANS