गणतंत्र दिवस परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना आकर्षण, संयुक्त सैन्य शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शनBy Admin Mon, 26 January 2026 07:15 AM

नई दिल्ली- सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केंद्र में रहा, जब भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सिंदूर का ध्वज लेकर आकाश में उड़े। यह दृश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में उच्च-मूल्य वाले आतंकी ठिकानों के खिलाफ पिछले वर्ष की गई भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई को समर्पित था।

इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों की त्रि-सेवा झांकी भी प्रदर्शित की गई, जिसका विषय था ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता के माध्यम से विजय’। यह झांकी भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की सामूहिक शक्ति, एकता और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उनके निर्बाध समन्वय का प्रतीक बनी।

झांकी में एकीकृत संचालन केंद्र (इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर—IOC) के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भी दर्शाया गया। इसमें मिशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के समन्वित और तालमेलपूर्ण प्रयासों को रेखांकित किया गया।

कांच से घिरे एकीकृत संचालन केंद्र के दृश्य में यह दिखाया गया कि कैसे इस ऑपरेशन की प्रभावी योजना बनाई गई, मार्गदर्शन किया गया और राष्ट्रीय व सैन्य नेतृत्व द्वारा इसकी निरंतर निगरानी की गई। ऑपरेशन की सफलता के पीछे अंतर-सेवा समन्वय और स्थानीय आबादी के सक्रिय सहयोग को अहम कारक बताया गया।

ऑपरेशन सिंदूर की पहचान के रूप में ‘विरासत, विविधता और विकास’ के संगम को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

जहां ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली ने दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक प्रहार किए, वहीं आकाश मिसाइल सिस्टम और एस-400 वायु रक्षा नेटवर्क ने ‘सुदर्शन चक्र’ की अवधारणा के तहत नागरिक आबादी को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया।

झांकी के कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स खंड में दिव्यास्त्र और शक्तिबाण को प्रदर्शित किया गया। हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMV 6x6) पर तैनात इन प्लेटफॉर्म्स ने भारतीय सेना के स्वदेशीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण पर बढ़ते फोकस को दर्शाया।

भारत की अगली पीढ़ी की मानवरहित युद्ध क्षमता को शक्तिबाण और दिव्यास्त्र प्रणालियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिन्हें विशेष HMV 6x6 प्लेटफॉर्म्स पर लगाया गया है। निगरानी और लक्ष्य निर्धारण की एकीकृत अवधारणा पर आधारित ये प्रणालियां सेना के तकनीक-आधारित और सटीक युद्ध की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही हैं।

शक्तिबाण और दिव्यास्त्र में स्वार्म ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी हाइब्रिड यूएवी ZOLT शामिल हैं, जो तोपखाने की फायर डायरेक्शन में अहम भूमिका निभाता है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म स्वार्म ड्रोन की तैनाती, सटीक हमलों के लिए लंबी दूरी के ड्रोन और युद्धक्षेत्र में प्रभावी कार्रवाई के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन के उपयोग में सक्षम हैं।

शक्तिबाण वाहन की कमान 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा ने संभाली, जबकि दिव्यास्त्र वाहन का नेतृत्व उसी रेजिमेंट के सूबेदार किरण मेदार ने किया। यह भारतीय सेना के जवानों की उच्च स्तर की तैयारी और पेशेवर दक्षता को दर्शाता है।

गौरतलब है कि मई 2025 में अंजाम दिए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों को ढेर किया गया था। यह सैन्य कार्रवाई 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी।

 

With inputs from IANS