भेदभावपूर्ण यूजीसी दिशानिर्देशों के खिलाफ सामान्य वर्ग का प्रदर्शन, यूजीसी मुख्यालय पर जोरदार विरोधBy Admin Tue, 27 January 2026 06:40 AM

नई दिल्ली:
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी नए भेदभाव-रोधी दिशानिर्देशों के विरोध में मंगलवार को सामान्य वर्ग के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने नई दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए दिशानिर्देश समानता के सिद्धांत के खिलाफ हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों में सामान्य वर्ग के साथ संस्थागत भेदभाव को बढ़ावा देंगे।

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि यूजीसी के नए नियमों में शिकायत की प्रक्रिया को एकतरफा बना दिया गया है, जिसमें आरोप लगते ही कार्रवाई का प्रावधान है, जबकि निष्पक्ष जांच, ठोस प्रमाण और आरोपी को सुनवाई का पर्याप्त अवसर सुनिश्चित नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इससे विश्वविद्यालय परिसरों में भय का माहौल बनेगा और शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी।

प्रदर्शनकारियों ने तख्तियों और बैनरों के माध्यम से “न्याय चाहिए, डर नहीं”, “समान कानून, समान अधिकार” और “पहचान नहीं, प्रमाण के आधार पर न्याय” जैसे नारे लगाए। उनका कहना था कि वे किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि ऐसी नीतियों का विरोध कर रहे हैं जो जन्म के आधार पर दोष और निर्दोष तय करती हैं।

कुछ शिक्षकों ने आशंका जताई कि इन दिशानिर्देशों के चलते मूल्यांकन, शोध मार्गदर्शन और अकादमिक बहस जैसे सामान्य कार्य भी शिकायतों के दायरे में आ सकते हैं, जिससे शिक्षक और छात्र खुलकर संवाद करने से बचेंगे।

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी से मांग की कि वह दिशानिर्देशों की समीक्षा करे, स्पष्ट परिभाषाएं जोड़े और झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को देशभर के विश्वविद्यालयों तक फैलाया जाएगा।

यूजीसी की ओर से फिलहाल इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।