
नई दिल्ली।
सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताए जा रहे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए दिशानिर्देशों को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच केंद्र की मोदी सरकार जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, संसद सत्र से पहले सरकार इस मुद्दे पर औपचारिक बयान या स्पष्टीकरण लाने पर विचार कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि यूजीसी के दिशानिर्देशों का उद्देश्य सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव करना नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, निष्पक्षता और संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा उसकी प्राथमिकता है। संभावित स्पष्टीकरण में यह भी कहा जा सकता है कि यूजीसी के नियमों का गलत अर्थ निकालकर सामान्य वर्ग के छात्रों में भय का माहौल नहीं बनाया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित या एकतरफा कार्रवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि यूजीसी द्वारा हाल ही में जारी किए गए भेदभाव-रोधी दिशानिर्देशों के बाद कई विश्वविद्यालय परिसरों में असंतोष देखने को मिल रहा है। सामान्य वर्ग के छात्र संगठनों का आरोप है कि ये नियम अस्पष्ट हैं और इनके तहत बिना ठोस सबूत के भी शिकायत दर्ज की जा सकती है, जिससे छात्रों और शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा।
देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों, अभिभावकों और सामाजिक समूहों द्वारा प्रदर्शन, धरना और ज्ञापन सौंपने का सिलसिला जारी है। नई दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दिशानिर्देशों में स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान जोड़े जाएँ और सभी वर्गों के लिए समान न्याय सुनिश्चित किया जाए।
राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल के भीतर भी कुछ स्तर पर असहजता के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में संसद सत्र से पहले सरकार की ओर से आने वाला स्पष्टीकरण न केवल छात्रों के बीच फैली आशंकाओं को कम करने का प्रयास होगा, बल्कि बढ़ते राजनीतिक दबाव को भी संतुलित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।