
नई दिल्ली, 2 जनवरी: नए यूजीसी नियमों को लेकर जारी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि नए दिशानिर्देशों की आड़ में किसी को भी “भेदभाव या उत्पीड़न” करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिक्षा नियामक संस्था और सरकार यह सुनिश्चित करेंगी कि इन नियमों को पूरी निष्पक्षता के साथ ज़मीनी स्तर पर लागू किया जाए।
आज पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा,
“मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि नए यूजीसी नियमों के नाम पर किसी भी तरह का भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा। कानून का दुरुपयोग कोई नहीं कर सकता।”
शिक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता” से जुड़े नए यूजीसी नियमों को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच भारी नाराज़गी देखी जा रही है। कई लोगों ने इन नियमों को ऊँची जातियों से आने वाले छात्रों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताया है।
इससे पहले दिन में, माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर #ShameonUGC सबसे बड़ा ट्रेंड बन गया, जहां कई यूज़र्स ने नए नियमों को सामान्य श्रेणी (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ बताया।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब यूजीसी ने “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम 2026” के तहत शिकायत निवारण और वंचित वर्गों के समर्थन के लिए नए नियम जारी किए।
इन नियमों के बाद ऊँची जातियों से आने वाले छात्रों में गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने आज यूजीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया।
विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब सोमवार को एक वरिष्ठ नौकरशाह और भाजपा के युवा मोर्चा के एक नेता ने इन नियमों को “भेदभावपूर्ण और दमनकारी” बताते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, हर उच्च शिक्षा संस्थान को एक समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre) स्थापित करना होगा, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांगजन (PwDs) और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।