
रायपुर — छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। राज्य के महासमुंद ज़िला में शनिवार को हथियारों के साथ 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में नौ महिलाएं और छह पुरुष शामिल हैं।
ये सभी माओवादी ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय बलांगीर-बरगढ़- महासमुंद (BBM) समिति से जुड़े हुए थे।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा,
“हथियार छोड़कर संविधान और तिरंगे को अपनाना। राज्य समिति सदस्य (SCM) के रूप में सक्रिय विकास उर्फ बाबन्ना सहित 15 माओवादियों ने, जिन पर कुल लगभग 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था, 3 AK-47 समेत 14 हथियार समाज को सौंपते हुए विकास का मार्ग चुना और पुनर्वास नीति का लाभ लिया।”
उन्होंने आगे लिखा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के मार्गदर्शन में विष्णुदेव साय सरकार की पुनर्वास नीति और सुशासन के प्रति विश्वास के चलते कई भटके हुए युवा मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने पुलिस को अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा सौंपा, जिसमें 3 AK-47 राइफलें, 2 SLR (सेल्फ-लोडिंग राइफल) और 2 INSAS (इंडियन स्मॉल आर्म्स सिस्टम) राइफलें शामिल हैं।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए इसे राज्य के नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी कामयाबी बताया। उन्होंने कहा,
“इन 15 लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के निरंतर दबाव, दूरदराज़ इलाकों में विकास कार्यों और राज्य सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति का परिणाम है। सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों को पूर्ण सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामान्य जीवन में पुनः शामिल होने के लिए हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में BBM डिवीजन के डिविजनल कमेटी, एरिया कमेटी और पार्टी स्तर के सदस्य शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्च 2026 तक राज्य से माओवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों के मुताबिक, 2024 के बाद से आत्मसमर्पण की घटनाओं में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है और हाल के महीनों में हजारों नक्सली और उनके समर्थक हथियार छोड़ चुके हैं।
सुरक्षा बलों का मानना है कि सघन अभियानों, बेहतर सड़क संपर्क, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं और आजीविका योजनाओं ने माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में बड़ा बदलाव लाया है।
राज्य की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत पूर्व माओवादियों को आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, रोज़गार के अवसर और उनके परिवारों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज़ीकरण और पुनर्वास प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।
यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा क्षेत्र में कमजोर पड़ते नक्सली प्रभाव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है और सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है।
With inputs from IANS