
पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे शुभेंदु अधिकारी अब राज्य के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं। मेदिनीपुर के एक राजनीतिक परिवार में जन्मे शुभेंदु ने छात्र राजनीति से लेकर सत्ता के शीर्ष तक का लंबा सफर तय किया है।
उनके पिता शिशिर अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते थे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े शुभेंदु अधिकारी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में वह तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
साल 2009 से 2014 तक वह तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर तमलुक लोकसभा सीट से सांसद रहे। इसके बाद ममता बनर्जी सरकार में उन्होंने परिवहन और जल संसाधन जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
शुभेंदु अधिकारी को सबसे ज्यादा पहचान 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से मिली। इस आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और राज्य की राजनीति में खुद को मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया।
हालांकि, समय के साथ तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व से उनके रिश्तों में खटास आने लगी। पार्टी में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के बीच शुभेंदु और ममता बनर्जी के बीच दूरी बढ़ती गई। आखिरकार 2020 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।
2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने और लगातार ममता सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाते रहे।
2026 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ साबित की। शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को करीब 15 हजार वोटों से हराया।
बीजेपी के सबसे प्रभावशाली और आक्रामक नेताओं में गिने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी अब पूर्ण बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और केंद्र सरकार की योजनाओं को तेजी से लागू करने की होगी।
नई सरकार में उन्हें दो उपमुख्यमंत्रियों — अंगामित्रा पॉल और शंकर घोष — का भी साथ मिला है।