भारत के कदमों के बाद उत्तरी सीमा पर चीनी सैनिकों की तैनाती में बड़ी कमी: रक्षा मंत्रालयBy IANS Mon, 14 September 2026 04:54 PM

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भारत-चीन सीमा पर सैन्य स्थिति में पिछले वर्ष महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास भारत द्वारा 10 ब्रिगेड स्तर की संयुक्त सैन्य टुकड़ियां तैनात किए जाने के बाद उत्तरी सीमाओं के सामने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी आई है।

एक ब्रिगेड में आम तौर पर करीब 3,000 सैनिक और उनसे जुड़ी सहायक इकाइयां होती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना की LAC के सभी सेक्टरों में तैनाती मजबूत है और वह किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2025 में भारतीय सेना ने उत्तरी सीमा पर 10 ब्रिगेड आकार की संयुक्त हथियार प्रणाली वाली सैन्य टुकड़ियां तैनात की थीं। इनमें पैदल सेना, बख्तरबंद इकाइयां, तोपखाना और वायु रक्षा जैसी अलग-अलग सैन्य क्षमताएं शामिल थीं। इस तरह की ‘कंबाइंड आर्म्स’ संरचना इन इकाइयों को अलग से सैन्य अभियान चलाने और बदलती युद्ध परिस्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है।

मंत्रालय ने कहा कि इन तैनातियों के साथ सेना ने उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा जारी रखी। वहीं, राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर भारत और चीन के बीच लगातार संपर्क ने भी सीमा पर स्थिरता बनाए रखने में योगदान दिया।

रिपोर्ट में भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और समन्वय के लिए विभिन्न तंत्रों के दोबारा सक्रिय होने को भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया गया है। मार्च और जुलाई 2025 में Working Mechanism for Consultation and Coordination (WMCC) की 33वीं और 34वीं बैठक हुईं।

इसके अलावा, सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधि (Special Representatives) स्तर की वार्ता भी फिर शुरू हुई। दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में इस स्तर पर दो दौर की बातचीत हुई।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क से द्विपक्षीय संबंधों में आए सकारात्मक बदलावों को और मजबूती मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने भी इस प्रक्रिया को गति दी।

सैन्य स्तर पर भी बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा। रिपोर्ट में 25-26 अक्टूबर 2025 को पूर्वी लद्दाख में हुई 23वीं Corps Commander Level Meet का उल्लेख किया गया है। इसे दोनों देशों के वरिष्ठतम सैन्य कमांडर स्तर के संवाद तंत्रों में से एक बताया गया है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जमीनी स्तर पर भी विभिन्न सेक्टरों में PLA के साथ Border Personnel Meetings जारी रहीं। इन बैठकों में दोनों पक्षों ने संबंधित मुद्दों को सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण माहौल में सुलझाने का प्रयास किया।

वार्षिक रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति का भी उल्लेख किया गया। मंत्रालय ने कहा कि सेना के लगातार प्रयासों के कारण वहां की समग्र सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में रही।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर और नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास सुरक्षा वातावरण में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। 10 मई और 12 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGsMO) के बीच बातचीत के बाद स्थिति काफी हद तक स्थिर हुई।

हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने आगाह किया कि स्थिति स्थिर होने के बावजूद LoC और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा वातावरण पूरी तरह अप्रत्याशित बना हुआ है। इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सतर्कता और सैन्य तैयारियां बनाए रखना जरूरी है।

रिपोर्ट का समग्र आकलन यह संकेत देता है कि भारत ने उत्तरी सीमा पर मजबूत सैन्य तैनाती के साथ-साथ कूटनीतिक और सैन्य संवाद के समानांतर रास्ते को भी जारी रखा है। इससे सीमा पर तनाव को नियंत्रित रखने और संभावित आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत की स्थिति मजबूत हुई है।