
भूटान में ग्लेशियल झील से अचानक भारी मात्रा में पानी निकलने के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। भूटान के लेमथांग क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद पानी मो छू नदी के रास्ते संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, असम के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी प्रशासन सतर्क हो गया है।
संकोश नदी के आसपास हाई अलर्ट
पानी के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने संकोश नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। दार्जिलिंग की पहाड़ियों के साथ तराई और डुआर्स क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। शुरुआती चेतावनी के मुताबिक, पानी का तेज बहाव पांच से छह घंटे के भीतर मैदानी इलाकों तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी।
हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
हालात की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया गया है। अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ के मुताबिक, करीब चार से पांच हजार लोगों को स्कूल भवनों में बनाए गए राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। इसके अलावा छह हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित इलाकों में स्थानांतरित किया गया है।
राहत शिविरों में लोगों के लिए पीने का पानी, सूखा राशन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
NDRF और SDRF की टीमें अलर्ट पर
आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। SDRF और सिविल डिफेंस के जवानों को तैनात किया गया है, जबकि NDRF को भी अलर्ट कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन भूटान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि हालात की जानकारी मिलती रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पानी का बहाव कम, लेकिन खतरा बरकरार
इस बीच राहत की बात यह है कि नदी में पानी के बहाव में कुछ कमी आने की सूचना मिली है। हालांकि, संकोश नदी प्रणाली के लिए रेड अलर्ट अभी भी जारी है। अधिकारियों को आशंका है कि पानी के साथ लकड़ियां, कंक्रीट और अन्य तरह का मलबा भी बहकर आ सकता है।
ऐसे में प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर ही रहने की अपील की है। फिलहाल राहत और बचाव एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।