
नई दिल्ली: भारत के युवा शतरंज खिलाड़ी अपार सक्सेना ने बेहद कम समय में शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए इंटरनेशनल मास्टर (IM) का खिताब अपने नाम कर लिया है। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने यूरोप में खेले गए टूर्नामेंट्स की एक शानदार श्रृंखला के दम पर सिर्फ पांच हफ्तों में तीनों जरूरी नॉर्म पूरे कर लिए।
बेंगलुरु के रहने वाले अपार ने 30 मार्च को बोस्निया में आयोजित IM रेनोमे 2 टूर्नामेंट में 9 में से 7 अंक हासिल कर पहला IM नॉर्म अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने 6 अप्रैल को स्पेन में हुए सैन विसेंटे ओपन में भी 7/9 का शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा नॉर्म हासिल किया। इस टूर्नामेंट में 54 देशों के 500 से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जहां अपार ने दो राउंड पहले ही अपना नॉर्म सुनिश्चित कर अपनी स्थिरता और आत्मविश्वास दिखाया।
अप्रैल के अंत में मेनोर्का ओपन में भी उनका प्रदर्शन दमदार रहा, जहां उन्होंने 2404 का परफॉर्मेंस रेटिंग हासिल किया और रेटिंग में अच्छा उछाल पाया। हालांकि यहां वह तीसरा नॉर्म लेने से थोड़े अंतर से चूक गए, लेकिन जीत की दौड़ में बने रहे।
आखिरकार 3 मई को सर्बिया में आयोजित IM पुटनिक 114 टूर्नामेंट में उन्होंने फिर से 7/9 का प्रदर्शन करते हुए तीसरा और अंतिम नॉर्म हासिल कर इंटरनेशनल मास्टर का खिताब पक्का कर लिया। इस दौरान उनकी लाइव रेटिंग 2450 के पार पहुंच गई, जबकि उनकी आधिकारिक रेटिंग 1 मई तक 2362 दर्ज की गई, जो पहले 2185 थी।
इतने कम समय में यह उपलब्धि हासिल करना अपार की शानदार फॉर्म और प्रतिभा को दर्शाता है, और उन्हें भारत के उभरते हुए सबसे होनहार शतरंज खिलाड़ियों में शामिल करता है।
अपार की इस सफलता में उनके स्कूल ‘सिलिकॉन सिटी एकेडमी ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन’, बेंगलुरु का भी अहम योगदान रहा। प्रिंसिपल सुमालिनी मैम और स्कूल कोऑर्डिनेटर शेनॉय मैम ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया। खास बात यह है कि पिछले दो वर्षों में उनके पास कोई पर्सनल कोच नहीं था। इससे पहले उन्हें जयराम रमणा ने प्रशिक्षण दिया था, जबकि उन्होंने किलर चेस ट्रेनिंग और यूरी वोव्क के कोर्सेज से भी मार्गदर्शन लिया।
उनके पिता प्रशांत सक्सेना ने उनकी ट्रेनिंग, तैयारी और टूर्नामेंट प्लानिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं उनकी मां रुचि सक्सेना हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं।
अपार की यह उपलब्धि न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत विश्व शतरंज में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उनकी मौजूदा प्रगति को देखते हुए आने वाले समय में उनसे और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।
With inputs from IANS