

नई दिल्ली। जर्मनी के दिग्गज गोलकीपर ओलिवर कान का मानना है कि लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो की प्रतिद्वंद्विता फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार प्रतिद्वंद्विताओं में से एक है। उनके अनुसार, दोनों खिलाड़ियों ने लगभग दो दशकों तक लगातार एक-दूसरे को बेहतर बनने के लिए प्रेरित किया और खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
फीफा विश्व कप 2026 के लिए ज़ी5 के एक्सपर्ट पैनल का हिस्सा बने कान ने कहा कि मेसी और रोनाल्डो की प्रतिस्पर्धा कभी बयानबाजी पर आधारित नहीं रही, बल्कि मैदान पर उनके शानदार प्रदर्शन ने ही इसे खास बनाया।
उन्होंने कहा, "क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी ने करीब 20 वर्षों तक एक-दूसरे को लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित किया। आज भी दोनों जिस स्तर का फुटबॉल खेल रहे हैं, वह अविश्वसनीय है। उनकी प्रतिद्वंद्विता शब्दों से नहीं, बल्कि प्रदर्शन से बनी। हर सीजन दोनों ने एक-दूसरे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की चुनौती दी। इतनी निरंतरता और उत्कृष्टता वाली प्रतिद्वंद्विता शायद फुटबॉल दोबारा कभी न देख पाए।"

मेसी और रोनाल्डो क्लब फुटबॉल में लंबे समय तक एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी रहे, लेकिन उन्हें कभी फीफा विश्व कप में आमने-सामने खेलने का मौका नहीं मिला। मौजूदा विश्व कप को दोनों दिग्गजों का आखिरी विश्व कप माना जा रहा है, ऐसे में प्रशंसकों को उम्मीद है कि दोनों अपने करियर के इस अंतिम बड़े मंच पर यादगार प्रदर्शन करेंगे और अपनी ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता में एक और अध्याय जोड़ेंगे।
कान ने 2002 फीफा विश्व कप की अपनी यादों को भी साझा किया। उस टूर्नामेंट में वह इतिहास के इकलौते गोलकीपर बने थे, जिन्हें टीम के उपविजेता रहने के बावजूद गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि विश्व कप ट्रॉफी नहीं जीत पाने का अफसोस आज भी उनके मन में है।
उन्होंने कहा, "2002 विश्व कप मेरे करियर के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रहा। फाइनल हारने का दर्द आज भी है, क्योंकि हर खिलाड़ी का सपना विश्व कप जीतना होता है। लेकिन समय के साथ आप उस सफर, टीम भावना और साथियों के साथ बिताए पलों की अहमियत समझने लगते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "गोलकीपर के रूप में गोल्डन बॉल जीतना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात थी, लेकिन अगर मौका मिले तो मैं यह पुरस्कार विश्व कप ट्रॉफी के बदले खुशी-खुशी दे दूंगा।"
युवा गोलकीपरों के लिए संदेश देते हुए कान ने कहा कि दबाव से घबराने के बजाय उसका आनंद लेना सीखना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मेरी सलाह है कि हमेशा सीखते रहें। सबसे जरूरी बात यह है कि दबाव से डरने के बजाय उसका आनंद लेना सीखें। विश्व कप में पूरी दुनिया आपको देख रही होती है और यही वह मंच है, जिसके लिए खिलाड़ी मेहनत करता है।"
उन्होंने कहा, "मैदान पर हर पल पूरी एकाग्रता बनाए रखें, क्योंकि कई बार एक ही क्षण पूरे टूर्नामेंट में आपकी पहचान तय कर देता है।"
With inputs from IANS