श्रीकांत के लिए खिताब का इंतजार बरकरार, यूएस ओपन में उपविजेता बनकर लौटेBy Admin Mon, 29 June 2026 01:52 PM

भारत के अनुभवी बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत का बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीतने का इंतजार अभी और लंबा हो गया। अमेरिका के फुलर्टन में खेले गए यूएस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में रविवार को उन्हें चीनी ताइपे के सु ली यांग के हाथों 15-21, 21-16, 9-21 से हार का सामना करना पड़ा। एक घंटे नौ मिनट तक चले मुकाबले में 33 वर्षीय श्रीकांत ने शानदार संघर्ष किया, लेकिन निर्णायक गेम में वह लय कायम नहीं रख सके।

मैच के बाद श्रीकांत ने कहा कि उनकी तैयारियां सही दिशा में हैं और उन्हें अपने खेल पर भरोसा है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मैं सही रास्ते पर हूं। बस अहम मौकों पर महत्वपूर्ण अंक जीतने की जरूरत है। सु ली यांग पिछले कुछ महीनों से शानदार खेल रहे हैं और आज उन्होंने निर्णायक क्षणों में बेहतरीन प्रदर्शन किया।"

श्रीकांत ने आखिरी बार 2017 में फ्रेंच ओपन जीतकर बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद वह कई मौकों पर खिताब के करीब पहुंचे, लेकिन सफलता हासिल नहीं कर सके।

दोनों खिलाड़ियों के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी। इससे पहले दोनों एक-एक मुकाबला जीत चुके थे। मई में थाईलैंड ओपन के प्री-क्वार्टर फाइनल में भी सु ली यांग ने श्रीकांत को तीन गेम तक चले मुकाबले में हराया था।

फाइनल के पहले गेम में सु ली यांग ने तेज शुरुआत करते हुए 10-5 की बढ़त बना ली। हालांकि श्रीकांत ने वापसी कर स्कोर 10-10 से बराबर कर दिया, लेकिन इसके बाद सु ने लगातार सात अंक जीतकर पहला गेम अपने नाम कर लिया।

ADVERTISEMENT
Advertisement

दूसरे गेम में श्रीकांत ने दमदार वापसी की। 15-13 की बढ़त के बाद उन्होंने लगातार अंक जुटाकर स्कोर 20-13 कर दिया और चौथे गेम प्वाइंट पर मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। हालांकि इस गेम में की गई अतिरिक्त मेहनत का असर तीसरे गेम में साफ दिखाई दिया।

निर्णायक गेम की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर रही और स्कोर 9-7 तक पहुंचा। इसके बाद 24 वर्षीय सु ली यांग ने लगातार आठ अंक जीतकर मैच और अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीत लिया।

खिताब जीतने के बाद सु ली यांग ने कहा, "मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि मैंने यह कर दिखाया। अंतिम गेम में हम दोनों थक चुके थे, लेकिन मैंने खुद से कहा कि ध्यान बनाए रखना है और खुद पर भरोसा रखना है। मैंने इस खिताब के लिए बहुत मेहनत की है। यह मेरा पहला वर्ल्ड टूर खिताब है और मुझे विश्वास है कि आगे भी कई खिताब जीतूंगा।"

पूरे टूर्नामेंट के दौरान श्रीकांत ने खेल भावना की भी शानदार मिसाल पेश की। सेमीफाइनल में एक विवादित फैसले के दौरान जब अधिकारियों ने गलत निर्णय बदलने से इनकार कर दिया, तब श्रीकांत स्वयं रेफरी के पास गए और विरोधी खिलाड़ी जापान के ओकिमोटो के पक्ष में अंक लौटाने का आग्रह किया। उनके इस कदम की खेल जगत में काफी सराहना हुई।