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जब मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) पहली बार एशियाई खेलों में पदक खेल के रूप में शामिल होगा, तब भारत के वरुण सान्याल अची-नागोया 2026 में सिर्फ एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि एक लंबे व्यक्तिगत और खेल सफर के साथ उतरेंगे। कुश्ती, WWE और ‘रॉकी’ फिल्म के किरदार रॉकी बाल्बोआ की कहानी से प्रभावित वरुण अब एशियाई खेलों में MMA के ऐतिहासिक पदार्पण को अपने करियर के बड़े मौके के रूप में देख रहे हैं।
दो बार के राष्ट्रीय चैंपियन वरुण ने जनवरी 2026 में चीन में आयोजित एशियन AMMA चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। वह एशियाई खेलों में पुरुषों की ट्रेडिशनल 77 किग्रा श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह पहला मौका होगा जब MMA एशियाई खेलों में पदक स्पर्धा के तौर पर शामिल किया गया है।
भारत की दो सदस्यीय MMA टीम में वरुण के अलावा सुचिका तारियाल हुड्डा भी शामिल हैं। सुचिका ने 2022 में हांगझोउ एशियाई खेलों में कुराश में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और इस बार वह महिलाओं की 60 किग्रा श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करेंगी।
पेशेवर MMA फाइटर होने के साथ-साथ वरुण क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से बिजनेस मैनेजमेंट में ऑनर्स की डिग्री हासिल कर चुके हैं। कॉम्बैट स्पोर्ट्स के प्रति उनका आकर्षण हालांकि सीधे MMA से नहीं शुरू हुआ। WWE और TNA की प्रोफेशनल रेसलिंग ने सबसे पहले उनका ध्यान खींचा, जबकि 2012 लंदन ओलंपिक में सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त की सफलता ने उन्हें मार्शल आर्ट्स की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
SAI Media से बातचीत में वरुण ने कहा, “अपने ओलंपियनों को सफल होते देखना मुझे मार्शल आर्ट्स और फिर MMA की ओर खींच लाया। MMA कई मायनों में खेल और प्रतिस्पर्धा का सबसे मौलिक रूप है, इसलिए मैं स्वाभाविक रूप से इसकी ओर आकर्षित हुआ।”
उन्होंने MMA को केवल प्रतिस्पर्धी खेल नहीं बल्कि जीवन में काम आने वाला कौशल भी बताया। उनके मुताबिक, खुद का बचाव करना, दबाव में शांत रहना और शारीरिक खतरे के बीच सही फैसला लेना इस खेल से मिलने वाली महत्वपूर्ण सीख हैं।
वरुण का खेल सफर भी कई अलग-अलग खेलों से होकर गुजरा है। सिंगापुर में पले-बढ़े वरुण ने क्रिकेट, फुटबॉल, एथलेटिक्स और स्क्वैश खेला। इसके बाद उन्होंने पावरलिफ्टिंग की और फिर कुश्ती, जिउ-जित्सु, मुए थाई होते हुए MMA तक पहुंचे।
उनके इस सफर में पिता और अर्थशास्त्री-लेखक संजीव सान्याल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संजीव सान्याल प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं और वरुण के मुताबिक उन्होंने बचपन से ही खेलों के प्रति उनकी रुचि को प्रोत्साहित किया।
वरुण ने बताया कि उनके पिता उन्हें बचपन में फुटबॉल खेलने और स्क्वैश के लिए ले जाते थे और कभी-कभी उनके साथ दौड़ भी लगाते थे। उन्होंने कम उम्र में वरुण को ताइक्वांडो की कक्षाओं में भी भेजा, हालांकि उस समय उन्हें इसमें ज्यादा रुचि नहीं थी।
MMA को लेकर पिता को शुरुआत में थोड़ा समय लगा, लेकिन वरुण के अनुसार बाद में वह लगातार उनके करियर का समर्थन करते रहे। वह MMA के बारे में उनसे चर्चा करते हैं और खेल को समझने की कोशिश करते हैं।
एशियाई खेलों के लिए वरुण की राह हालांकि आसान नहीं रही। 2025 में MMA SFI नेशनल्स जीतने के बाद उन्होंने चीन में एशियन AMMA चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। वहां कांस्य पदक जीतने के बाद वह एशियाई रैंकिंग प्रणाली में जगह बनाने में सफल रहे।
लेकिन एशियाई खेलों के लिए क्वालीफिकेशन को लेकर लंबे समय तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। वरुण ने बताया कि उस समय यह साफ नहीं था कि कौन खिलाड़ी एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करेगा और प्रक्रिया क्या होगी। इसलिए उन्होंने इंतजार करने के बजाय अपने पेशेवर करियर पर ध्यान देना जारी रखा।
उन्हें एशियाई खेलों में भाग लेने की अंतिम पुष्टि खेल शुरू होने से महज दो सप्ताह पहले मिली। इतने कम समय में मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को इतने बड़े आयोजन के लिए तैयार करना उनके लिए बड़ी चुनौती रहा।
अब वरुण को उम्मीद है कि एशियाई खेलों में MMA का शामिल होना भारत में इस खेल के विकास के लिए निर्णायक साबित होगा। हालांकि, उनका मानना है कि खिलाड़ियों को अभी भी अधिक संस्थागत और प्रत्यक्ष सहयोग की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले एक साल में MMA को लेकर पहले की तुलना में अधिक रुचि दिखाई है, जो सकारात्मक संकेत है। हालांकि, खिलाड़ियों को अपना करियर जारी रखने के लिए अभी भी अलग-अलग स्रोतों से आर्थिक और अन्य सहायता जुटानी पड़ रही है। वरुण को राफे एमफिब्र से प्रायोजन मिल रहा है और उन्होंने खेल से जुड़े अन्य लोगों के सहयोग का भी उल्लेख किया।
उन्होंने राष्ट्रीय महासंघ के अध्यक्ष निखिल कुंदर और अन्य पदाधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना की। वरुण के मुताबिक, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, आयोजनों, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों से जुड़े कई खर्चों का भार लंबे समय तक महासंघ चलाने वाले लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर उठाया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की बढ़ती रुचि स्वागत योग्य है, लेकिन अब इसे खिलाड़ियों के लिए प्रत्यक्ष सहायता में बदलते देखना भी जरूरी है।
वरुण का मानना है कि एशियाई खेलों में MMA के प्रवेश से भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धी मंच तैयार हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के दो खिलाड़ी एशिया के शीर्ष छह में रैंक कर रहे हैं और भविष्य में देश सभी भार वर्गों में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
उनके मुताबिक, जिस तरह भारत ने कुश्ती और मुक्केबाजी जैसे खेलों में अलग-अलग भार वर्गों में मजबूत आधार बनाया है, उसी तरह MMA में भी आने वाले वर्षों में सभी श्रेणियों में भारतीय खिलाड़ियों को उतारा जा सकता है।
अची-नागोया एशियाई खेलों में MMA का पदार्पण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत जैसे देश में इस खेल को व्यापक पहचान और संस्थागत समर्थन दिलाने का रास्ता खोल सकता है। वरुण सान्याल के लिए यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने का मौका नहीं, बल्कि भारतीय MMA के लिए एक नई शुरुआत का हिस्सा बनने का अवसर भी है।