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भारतीय रोअर टेंडेनथोई देवी हाओबिजाम आगामी एशियाई खेलों में मजबूत प्रदर्शन के लिए अपनी टीम की एकजुटता और लंबे समय से साथ किए जा रहे अभ्यास को बड़ी ताकत मानती हैं। उनका कहना है कि पिछले एक साल में साथ प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से टीम के बीच बेहतर तालमेल और आत्मविश्वास विकसित हुआ है।
आइची-नागोया में शनिवार से शुरू होने वाले एशियाई खेलों में 23 वर्षीय टेंडेनथोई महिला कॉक्सलेस फोर स्पर्धा में पूनम, अलीना एंटो और गुरबानी कौर के साथ भारतीय चुनौती पेश करेंगी। चारों खिलाड़ियों ने लंबे समय तक साथ प्रशिक्षण लिया है, जिससे एक-दूसरे की क्षमता, लय और प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों को समझने में मदद मिली है।
टेंडेनथोई ने कहा, “मेरा पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2023 के एशियाई खेलों में था। मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा था, लेकिन मैं बहुत आत्मविश्वास में नहीं थी, क्योंकि उस समय मैं अभी जूनियर थी। मुझे सीनियर खिलाड़ियों से काफी कुछ सीखना था और उनकी सलाह लेनी थी।”
उन्होंने कहा कि इस बार परिस्थितियां अलग हैं। टीम को लंबे समय तक साथ अभ्यास करने का मौका मिला है, जिससे खिलाड़ियों के बीच आपसी समझ मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा, “इस बार हमें लंबे समय तक साथ अभ्यास करने का मौका मिला। हम पिछले साल से साथ हैं, इसलिए एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जान पाए और साथ-साथ आगे बढ़ने का मौका मिला। इससे हमारा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।”
भारतीय टीम की तैयारी केवल घरेलू प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रही। खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लेने के साथ कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी प्रतिस्पर्धा की। टेंडेनथोई के मुताबिक, इन दौरों ने टीम को दबाव में प्रदर्शन करने और एक इकाई के रूप में बेहतर तालमेल विकसित करने में मदद की।
उन्होंने कहा, “हम ऑस्ट्रेलिया में एक प्रशिक्षण शिविर के लिए गए थे और यूरोप में भी काफी समय बिताया। वहां हमें दो-तीन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिला। हमने सीखा कि प्रतियोगिता को कैसे संभालना है, दबाव से कैसे निपटना है, आत्मविश्वास के साथ कैसे प्रदर्शन करना है और एक क्रू के रूप में कैसे बेहतर प्रदर्शन करना है। इन अनुभवों से मैंने बहुत कुछ सीखा।”
टेंडेनथोई ने अपने प्रशिक्षण में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस) के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, आईआईएस आने के बाद प्रशिक्षण के साथ-साथ खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक तैयारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
उन्होंने कहा, “आईआईएस आने के बाद काफी बदलाव हुए हैं। पहले हम एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करते थे, लेकिन यहां आने के बाद हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है और हमें लगता है कि हम बहुत कुछ कर सकते हैं। मैं पूरे साल यहां प्रशिक्षण ले रही हूं। आईआईएस का स्टाफ हमारी अच्छी देखभाल करता है और हमारे पोषण, फिजियोलॉजी और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी ध्यान देता है।”
कोच लक्ष्मी के साथ अपने रिश्ते को भी उन्होंने खास बताया। टेंडेनथोई ने कहा कि वह लक्ष्मी को 2007-08 के आसपास से जानती हैं और रोइंग शुरू करने से पहले ही उन्हें देखकर प्रेरित होती थीं।
उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें अभ्यास करते देखा है और देखा है कि उन्होंने राज्य को कितनी पहचान दिलाई। वह एशियाई खेलों में भी हिस्सा ले चुकी हैं। रोइंग शुरू करने से पहले ही मैं उनसे प्रेरित थी। अब जब मैं उनके साथ प्रशिक्षण लेती हूं, तो वह हमारा ध्यान रखती हैं और जब हमारा आत्मविश्वास कम होता है, तब हमें प्रेरित करती हैं।”
टेंडेनथोई ने अपने खेल सफर में परिवार के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि रोइंग शुरू करने के बाद से उनके माता-पिता ने लगातार उनका समर्थन किया और घर से दूर रहकर प्रशिक्षण लेने के दौरान भी उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा, “जब से मैंने रोइंग शुरू की है, मेरे माता-पिता ने मेरा बहुत समर्थन किया है। वे हमेशा कहते थे कि अगर मैं कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ अभ्यास करूं तो बहुत आगे जा सकती हूं। जब मुझे घर से दूर रहना पड़ा, तब भी उन्होंने मेरा साथ दिया और कहा कि खुद पर ध्यान दूं और हर दिन खुद को साबित करूं।”
टेंडेनथोई के लिए इस बार परिवार का भरोसा भी अतिरिक्त प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि उनकी बहन को विश्वास है कि वह आगामी एशियाई खेलों में पदक जीत सकती हैं।
एशियाई खेलों में अपने दूसरे अंतरराष्ट्रीय अभियान के लिए उतर रहीं टेंडेनथोई के पास अब 2023 के अनुभव के साथ बेहतर तैयारी, मजबूत टीम तालमेल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अतिरिक्त अनुभव है। ऐसे में भारतीय महिला कॉक्सलेस फोर से इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी।