एशियाई खेलों की जीत के बाद VVS लक्ष्मण ने श्रेयस अय्यर को बताया ‘खिलाड़ियों का कप्तान’By IANS Tue, 06 October 2026 05:36 PM

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एशियाई खेलों 2026 में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के स्वर्ण पदक बरकरार रखने के बाद मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण ने कप्तान श्रेयस अय्यर की जमकर तारीफ की है। उन्होंने अय्यर को ‘खिलाड़ियों का कप्तान’ बताते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता, तैयारी और मैदान पर खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने की क्षमता को रेखांकित किया।

भारत ने शनिवार को कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेले गए रोमांचक फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर एशियाई खेलों में पुरुष क्रिकेट का स्वर्ण पदक लगातार दूसरी बार अपने नाम किया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अभिषेक शर्मा के 28 गेंदों में 61 रन और तिलक वर्मा के नाबाद 51 रन की मदद से 6 विकेट पर 211 रन बनाए।

लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान ने हसन नवाज की 51 गेंदों में 96 रन की तेजतर्रार पारी के दम पर मुकाबले को रोमांचक बना दिया। हालांकि भारतीय ऑलराउंडरों और स्पिनरों ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और पाकिस्तान को 6 विकेट पर 192 रन तक सीमित कर दिया। शिवम दुबे ने अंतिम गेंद पर नवाज को आउट कर भारत की जीत और स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।

अभियान की समीक्षा करते हुए लक्ष्मण ने अय्यर के पहले बड़े कप्तानी कार्यभार को खास तौर पर सराहा। उन्होंने कहा कि अय्यर ने न केवल मैदान पर नेतृत्व किया, बल्कि हर मुकाबले से पहले विपक्षी टीम की ताकत और कमजोरियों का गहराई से अध्ययन किया।

“यह उनके कप्तानी करियर की सिर्फ शुरुआत है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि उन्हें काफी सफलता मिलेगी। वह खिलाड़ियों के कप्तान हैं। वह हर किसी को बहुत सहज महसूस कराते हैं और बल्ले से हो या मैदान पर, उदाहरण पेश करते हुए नेतृत्व करते हैं,” लक्ष्मण ने BCCI के एक वीडियो में कहा।

उन्होंने कहा कि अय्यर मैच से पहले की तैयारियों को लेकर भी काफी गंभीर रहे।

“टीम मीटिंग से पहले भी वह योजनाओं, विपक्षी टीम की ताकत और कमजोरियों के साथ बैठते हैं। उनकी तैयारी बहुत व्यवस्थित होती है और वह फिटनेस पर भी काफी जोर देते हैं,” लक्ष्मण ने कहा।

लक्ष्मण ने अय्यर की रणनीतिक समझ को भी रेखांकित किया, खासकर टी20 क्रिकेट में जहां परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और कप्तान को विपक्षी टीम से एक-दो कदम आगे रहने की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा, “वह खिलाड़ियों के शानदार लीडर हैं, रणनीतिक रूप से बहुत समझदार और तेज हैं। वह अपनी टीम के हर खिलाड़ी की ताकत को समझते हैं और जानते हैं कि उससे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे कराया जाए।”

लक्ष्मण के मुताबिक, अय्यर की विपक्षी टीम का आकलन करने की क्षमता भी उनकी कप्तानी की महत्वपूर्ण ताकत रही।

उन्होंने कहा, “खासकर टी20 में आपको विपक्षी टीम से एक या दो कदम आगे रहना होता है। जिस तरह वह विपक्षी टीम की ताकत और कमजोरियों का आकलन करते हैं, उससे उन्हें काफी अच्छी तैयारी मिलती है। यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई।”

लक्ष्मण ने पूरे अभियान में भारतीय टीम की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता को भी बड़ी उपलब्धि बताया। जापान पहुंचने के बाद टीम को मौसम, यात्रा, सीमित अभ्यास और तैयारी के लिए कम अवसर जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।

“जापान आने के बाद से ही हमें मौसम, यात्रा, अच्छे अभ्यास सत्रों की कमी और तैयारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन एक बार भी मुझे ऐसा नहीं लगा कि टीम या टीम का कोई खिलाड़ी बड़े मुकाबलों के लिए तैयार होने को लेकर उत्साहित नहीं था,” उन्होंने कहा।

उन्होंने बताया कि इनडोर परिस्थितियों में भी खिलाड़ियों ने फिटनेस पर काम जारी रखा और जब भी मैदान पर अभ्यास का मौका मिला, टीम ने उसका पूरा इस्तेमाल किया।

लक्ष्मण ने सेमीफाइनल और फाइनल में अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार टीम के खेल में बदलाव करने की क्षमता की भी सराहना की।

“एक चीज जिस पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है, वह है उनकी अनुकूलन क्षमता। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने खेल के तरीके में लचीलापन दिखाया। सेमीफाइनल में विकेट मुश्किल था, लेकिन उन्होंने सकारात्मक रवैया बनाए रखा। फाइनल में भी बल्ले और गेंद दोनों से उनका प्रदर्शन पेशेवर रहा,” उन्होंने कहा।

उन्होंने खराब मौसम और भारी बारिश के बावजूद नॉकआउट मुकाबलों को सफलतापूर्वक आयोजित कराने के लिए आयोजकों की भी प्रशंसा की।

लक्ष्मण ने कहा, “जब से हम आयोजन स्थल पर पहुंचे, तब से काफी बारिश हुई। इसके बावजूद दो अच्छे दिन का क्रिकेट कराना दिखाता है कि आयोजकों ने इस टूर्नामेंट को सफल बनाने के लिए कितनी मेहनत की।”

पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने एशियाई खेलों की सफलता को भारतीय क्रिकेट में मौजूद मजबूत बेंच स्ट्रेंथ का संकेत भी बताया। उन्होंने चयन समिति, टीम प्रबंधन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और BCCI द्वारा खिलाड़ियों के लिए आयोजित कैंप तथा विकास कार्यक्रमों को इसका अहम हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के जरिए युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने में मदद मिल रही है और मजबूत बेंच स्ट्रेंथ से राष्ट्रीय टीम को लगातार विकल्प मिलते रहेंगे।

लक्ष्मण ने कहा, “हमारे पास ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की भरमार है जो न सिर्फ अभी बल्कि अगले 5-10 वर्षों में भी देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्हें किस तरह मेंटर किया जाता है, किस तरह तैयार किया जाता है और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे कराया जाता है, यह हमारे हाथ में है।”

उन्होंने कहा कि पुरुष और महिला क्रिकेट सहित अलग-अलग प्रारूपों और आयु वर्गों में भारत के प्रदर्शन से देश में क्रिकेट की गहराई का पता चलता है।

“हमारे पास जो गहराई है, उसके साथ हम बहुत अच्छी स्थिति में हैं। बहुत से देश इस तरह की स्थिति में नहीं हैं,” लक्ष्मण ने कहा।

भारत की एशियाई खेलों की यह सफलता ऐसे समय में आई है जब देश का क्रिकेट ढांचा घरेलू स्तर से लेकर राष्ट्रीय टीम तक खिलाड़ियों के लिए लगातार नए विकास और प्रशिक्षण अवसर तैयार कर रहा है। लक्ष्मण के अनुसार, इसी प्रक्रिया से आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट को नई प्रतिभाएं मिलती रहेंगी।