एनएफआर के तकनीक आधारित उपायों से 160 से अधिक हाथियों की जान बची, ट्रेन संचालन हुआ अधिक सुरक्षितBy Admin Fri, 26 December 2025 06:41 AM

गुवाहाटी। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) ने जंगली हाथियों की ट्रेन से टकराने की घटनाओं को रोकने और अपने नेटवर्क पर सुरक्षित व निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए कई सक्रिय और तकनीक आधारित पहल की हैं। इन प्रयासों के चलते वर्ष 2025 में अब तक 160 से अधिक जंगली हाथियों की सफलतापूर्वक रक्षा की जा सकी है।

एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने गुरुवार को बताया कि रेलवे के निरंतर प्रयासों से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं और केवल 2025 में ही 160 से अधिक हाथियों की जान बचाई गई है। यह उपलब्धि वन्यजीव संरक्षण के प्रति एनएफआर की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में एक अहम कदम ‘इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम’ (आईडीएस) की तैनाती है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उन्नत तकनीक है और ‘डिस्ट्रिब्यूटेड अकॉस्टिक सिस्टम’ (डीएएस) के सिद्धांतों पर काम करती है।

यह प्रणाली रेलवे ट्रैक के पास हाथियों की गतिविधि का पता लगाकर तुरंत लोको पायलटों और नियंत्रण कक्षों को रियल-टाइम अलर्ट भेजती है, जिससे समय रहते एहतियाती कदम उठाए जा सकें और परिचालन सुरक्षा को बढ़ाया जा सके।

सीपीआरओ के अनुसार, आईडीएस को उन प्रमुख रेल खंडों में सफलतापूर्वक चालू किया गया है, जो हाथी गलियारों से होकर गुजरते हैं। फिलहाल यह प्रणाली चार महत्वपूर्ण सेक्शनों में कार्यरत है। इनमें असम के रंगिया डिवीजन के अंतर्गत 24 किलोमीटर लंबा कामाख्या–अजारा–मिर्ज़ा सेक्शन, लुमडिंग डिवीजन का 32 किलोमीटर हाबाईपुर–लमसाखांग–पाथरखोला–लुमडिंग सेक्शन, तिनसुकिया डिवीजन का 23 किलोमीटर तीताबर–मरियानी–नकाचारी सेक्शन तथा पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार डिवीजन का 52 किलोमीटर मदारिहाट–नगरकाटा सेक्शन शामिल हैं।

इन सभी परियोजनाओं के तहत कुल 62.7 किलोमीटर हाथी गलियारों और 131 किलोमीटर ब्लॉक सेक्शनों को कवर किया गया है, जिससे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए आईडीएस की स्थापना का कार्य अन्य डिवीजनों में भी जारी है। इनमें अलीपुरद्वार में 92 किलोमीटर, बिहार के कटिहार में 25 किलोमीटर, रंगिया में 174 किलोमीटर, लुमडिंग में 110 किलोमीटर और तिनसुकिया डिवीजन में 12 किलोमीटर शामिल हैं।

शर्मा ने बताया कि इन कार्यों के पूरा होने के बाद एनएफआर क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले सभी हाथी गलियारों को यह प्रणाली कवर करेगी। कुल मिलाकर 146.4 किलोमीटर हाथी गलियारे और 413.42 किलोमीटर ब्लॉक सेक्शन इसके दायरे में आएंगे, जिससे एक मजबूत और व्यापक सुरक्षा नेटवर्क तैयार होगा।

इसके अलावा एनएफआर ने ट्रेन और हाथियों के टकराव को कम करने के लिए अन्य नवाचारी उपाय भी अपनाए हैं। ‘प्लान बी’ प्रणाली के तहत संवेदनशील लेवल क्रॉसिंग गेटों पर मधुमक्खियों की तेज आवाज का उपयोग किया जाता है, जो लगभग 400 मीटर तक सुनाई देती है और हाथियों को ट्रैक के पास आने से रोकती है।

वन विभाग के साथ समन्वय में एनएफआर ने रियल-टाइम सूचना साझा करने, हाथी गलियारों में रात के समय गति प्रतिबंध, हाथियों की मौजूदगी के आधार पर अस्थायी स्पीड कर्ब, ट्रेन कर्मचारियों को जागरूक करने, चेतावनी संकेत लगाने और दृश्यता बढ़ाने के लिए झाड़ियों की कटाई जैसे उपाय भी मजबूत किए हैं।

एनएफआर अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय रेलवे ने डीएएस तकनीक आधारित एआई-सक्षम इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम को अपनाकर वन्यजीव संरक्षण को सशक्त किया है। एनएफआर में सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इस प्रणाली को देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार दिया जा रहा है।

इस विस्तार के तहत 981 अतिरिक्त रूट किलोमीटर को कवर किया जाएगा, जिससे भारतीय रेलवे में कुल कवरेज 1,122 रूट किलोमीटर तक पहुंच जाएगी और वन्यजीव संरक्षण के साथ सुरक्षित ट्रेन संचालन की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 से अब तक एनएफआर क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पार करते समय 2,000 से अधिक हाथियों की सुरक्षित रूप से रक्षा की जा चुकी है।

एनएफआर पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के सात जिलों और उत्तर बिहार के पांच जिलों में संचालन करता है, जहां उसके अधिकार क्षेत्र में कुल 7,362 ट्रैक किलोमीटर (टीकेएम) हैं।

 

With inputs from IANS