19 राज्यों के नागरिक घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे डिजिटल, कानूनी रूप से मान्य भूमि अभिलेख: सरकारBy Admin Fri, 02 January 2026 06:22 AM

नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने बताया कि देश के 19 राज्यों के नागरिक अब घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षरित और कानूनी रूप से मान्य भूमि अभिलेख डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही 406 जिलों में बैंक अब ऑनलाइन ही बंधक (मॉर्टगेज) का सत्यापन कर सकेंगे, जिससे ऋण तक पहुंच की प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आएगी।

भूमि संसाधन विभाग ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के प्रमुख घटकों में लगभग पूर्ण संतृप्ति हासिल कर ली है, जिससे भूमि प्रशासन प्रणाली “इन-लाइन” से “ऑनलाइन” व्यवस्था की ओर प्रभावी रूप से स्थानांतरित हो गई है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 97.27 प्रतिशत गांवों में रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है, जबकि 97.14 प्रतिशत क्षेत्रों में कैडस्ट्रल मानचित्रों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा, लगभग 84.89 प्रतिशत गांवों में टेक्स्ट आधारित RoR को स्थानिक कैडस्ट्रल मानचित्रों से सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है।

शहरी भूमि प्रबंधन की जटिलताओं को देखते हुए, नक्षा (नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज-बेस्ड लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशन्स) पायलट कार्यक्रम के तहत 157 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में तेजी से प्रगति दर्ज की गई है।

विभाग ने बताया कि 116 यूएलबी में हवाई सर्वेक्षण (एरियल फ्लाइंग) पूरा कर लिया गया है, जो निर्धारित लक्ष्यों का 87 प्रतिशत है। इसके तहत 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजरी से कवर किया गया।

इसके साथ ही 72 यूएलबी में ग्राउंड ट्रुथिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें 21 शहरों में 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

‘पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) 2025-26’ के तहत, भूमि संसाधन विभाग ने नक्षा से जुड़े विशिष्ट लक्ष्यों को हासिल करने वाले 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 1,050 करोड़ रुपये की फंडिंग की सफलतापूर्वक सिफारिश की है।

इसके अलावा, भू-निर्देशांकों पर आधारित 14 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड—यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपिन)—को “भूमि का आधार” स्थापित किया गया है। नवंबर 2025 तक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से अधिक भूमि खंडों को यूएलपिन आवंटित किया जा चुका है।

मंत्रालय के अनुसार, नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एनजीडीआरएस) ने संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया को सरल बनाया है और “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” को बढ़ावा दिया है। यह प्रणाली पंजाब, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा चुकी है।

वर्तमान में लगभग 88.6 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार कार्यालय (एसआरओ) राजस्व कार्यालयों के साथ एकीकृत हो चुके हैं, जिससे पंजीकरण के तुरंत बाद भूमि अभिलेखों में स्वतः नामांतरण (म्यूटेशन) संभव हो पा रहा है।

 

With inputs from IANS