
चंडीगढ़ — कोविड-19 महामारी के बाद अस्पतालों में संक्रमण एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इसी समस्या के समाधान की दिशा में पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के वैज्ञानिकों ने एक विशेष पेंट एडिटिव विकसित किया है, जो अस्पतालों में संक्रमण को कम करने में सहायक हो सकता है।
इस नवाचार को 31 दिसंबर 2025 को भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया। यह शोध रासायनिक अभियांत्रिकी और नैनोप्रौद्योगिकी विभाग के गौरव वर्मा के नेतृत्व में किया गया, जो कोविड-19 महामारी के दौरान हुए सहयोगात्मक अनुसंधान का परिणाम है।
शोध टीम में बायोफिजिक्स विभाग से अवनीत सैनी, शुभी जोशी और एमएससी की छात्रा दीक्षा शर्मा भी शामिल हैं।
यह पेंट एडिटिव सतहों पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में सक्षम है, जिससे अस्पतालों की दीवारें, बिस्तर और फर्नीचर अधिक सुरक्षित बनते हैं। खास बात यह है कि यह पदार्थ विषैला नहीं है और न ही हवा या आसपास के वातावरण में घुलता है, जिससे इसे इनडोर उपयोग के लिए सुरक्षित माना गया है।
पेटेंट प्राप्त यह पेंट तकनीक अस्पतालों और क्लीनिकों में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जा सकती है, जिससे संक्रमण के मामलों में कमी और मरीजों की सुरक्षा में सुधार संभव है।
इस विचार ने कोविड-19 महामारी के दौरान आकार लिया, जब अस्पतालों में होने वाले संक्रमणों के कारण, विशेषकर 2021-22 की डेल्टा लहर के समय, बड़ी संख्या में जानें गई थीं। ऐसे संक्रमण अक्सर दीवारों, बिस्तरों और फर्नीचर जैसी बार-बार छुई जाने वाली सतहों के माध्यम से फैलते हैं और इन्हें ब्लैक फंगस जैसी गंभीर जटिलताओं से भी जोड़ा गया।
इस नवाचार की कहानी वर्ष 2018 से शुरू होती है, जब फूड माइक्रोबायोलॉजिस्ट शुभी जोशी ने पीएचडी के लिए गौरव वर्मा से संपर्क किया। हालांकि उन्होंने पीयू की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में टॉप किया था, लेकिन अपने विषय में उन्हें दाखिला नहीं मिल सका।
इसके बाद वर्मा ने उन्हें अपनी प्रयोगशाला में स्थान दिया और नैनोमटेरियल्स से जुड़े एक चुनौतीपूर्ण शोध विषय पर काम करने का अवसर दिया। महामारी के दौरान भी टीम ने कोविड सुरक्षा नियमों और शारीरिक दूरी का पालन करते हुए प्रयोगशाला में शोध कार्य जारी रखा।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 2022 में एंटी-बैक्टीरियल पेंट एडिटिव का सफल विकास हुआ। वर्तमान में शुभी जोशी आईसीएमआर वूमन साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत हैं और पीयू की शोध टीम के साथ सहयोग जारी रखे हुए हैं।
गौरव वर्मा ने कहा कि यह नवाचार उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि हर छात्र में सार्थक विज्ञान करने की क्षमता होती है और विज्ञान का सीधा लाभ समाज तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पेंट केवल इमारतों को सुंदर बनाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें जीवन बचाने में भी मदद करनी चाहिए।
With inputs from IANS