स्कूल आधारित एचपीवी टीकाकरण से सामूहिक प्रतिरक्षा मजबूत होती है: अध्ययनBy Admin Tue, 06 January 2026 07:43 AM

नई दिल्ली: स्कूलों में मानव पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के खिलाफ टीकाकरण न केवल टीका लगवाने वाली लड़कियों को, बल्कि बिना टीकाकरण वाली महिलाओं को भी सामूहिक प्रतिरक्षा (हर्ड इम्युनिटी) के जरिए प्री-कैंसर कोशिकाओं के विकास से सुरक्षा प्रदान कर सकता है। यह जानकारी मंगलवार को द लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आई है।

एचपीवी एक आम यौन संचारित संक्रमण है और सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। एचपीवी टीकाकरण से टीका लगवाने वाले लोगों में सर्वाइकल कैंसर से जुड़े गंभीर बदलावों का जोखिम काफी कम हो जाता है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि इससे बिना टीकाकरण वाले लोगों को भी सुरक्षा मिलती है या नहीं।

करोलिंस्का इंस्टीट्यूट की शोधकर्ता ईवा मेगलिक ने कहा, “स्कूल आधारित एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम एक लागत प्रभावी रणनीति के रूप में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल टीकाकृत व्यक्तियों में, बल्कि पूरी आबादी में सर्वाइकल रोग और कैंसर का जोखिम कम किया जा सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह निष्कर्ष दर्शाता है कि उच्च स्तर के एचपीवी टीकाकरण के माध्यम से सामूहिक प्रतिरक्षा का प्रभाव हासिल किया जा सकता है।”

अध्ययन में स्वीडन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य रजिस्ट्री के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें 1985 से 2000 के बीच जन्मी 8 लाख से अधिक बिना टीकाकरण वाली महिलाओं को शामिल किया गया।

शोध में स्वीडन में लागू विभिन्न एचपीवी टीकाकरण रणनीतियों के अनुसार जन्म समूहों की तुलना की गई। इनमें अवसर आधारित टीकाकरण (1985-1988), सब्सिडी वाले कार्यक्रम (1989-1992), कैच-अप कार्यक्रम (1993-1998) और स्कूल आधारित टीकाकरण (1999-2000) शामिल थे।

अध्ययन में पाया गया कि 1999 और 2000 में जन्मी वे बिना टीकाकरण वाली महिलाएं, जो स्कूल आधारित कार्यक्रम के तहत टीकाकृत साथियों के बीच पली-बढ़ीं, उनमें सर्वाइकल क्षेत्र में गंभीर प्री-कैंसर बदलाव विकसित होने का जोखिम लगभग आधा था, जबकि 1985 से 1988 के बीच जन्मी उन महिलाओं में यह जोखिम अधिक था, जब टीकाकरण का स्तर कम था और केवल वही महिलाएं टीका लगवाती थीं, जो स्वयं इसके लिए आगे आती थीं।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक प्रेक्षणात्मक (ऑब्ज़र्वेशनल) अध्ययन है, इसलिए परिणामों पर अन्य कारकों का भी प्रभाव हो सकता है। इनमें विभिन्न जन्म समूहों के बीच यौन व्यवहार, सर्वाइकल स्क्रीनिंग में भागीदारी, जांच की प्रक्रियाएं और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसे पहलू शामिल हैं।

इसके बावजूद, नीति निर्माण और क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह अध्ययन सार्वभौमिक टीकाकरण पहलों को लगातार जारी रखने की आवश्यकता पर जोर देता है, विशेषकर स्कूल आयु वर्ग को लक्षित कार्यक्रमों पर, ताकि अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सके, शोधकर्ताओं ने कहा।

 

With inputs from IANS