योग से ओपिओइड विदड्रॉल से तेजी से उबरने में मदद, चिंता और नींद में भी सुधार: अध्ययनBy Admin Sun, 11 January 2026 03:36 AM

नई दिल्ली- एक अध्ययन के अनुसार, योग ओपिओइड विदड्रॉल से जूझ रहे लोगों की रिकवरी को तेज करने में मदद कर सकता है और उनमें चिंता, नींद तथा दर्द जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार ला सकता है।

ओपिओइड विदड्रॉल के दौरान दस्त, अनिद्रा, बुखार, दर्द, चिंता और अवसाद जैसे शारीरिक लक्षण सामने आते हैं। इसके अलावा पुतलियों का फैलना, नाक बहना, रोंगटे खड़े होना, भूख न लगना, जम्हाई, मतली, उल्टी और अत्यधिक पसीना आना जैसे स्वायत्त तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षण भी देखे जाते हैं। ये सभी समस्याएं नॉरएड्रेनर्जिक असंतुलन के कारण सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की अत्यधिक सक्रियता से उत्पन्न होती हैं।

बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (निमहांस) और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में ओपिओइड विदड्रॉल उपचार प्रोटोकॉल में योग को शामिल करने की सिफारिश की गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि योग केवल लक्षणों के प्रबंधन तक सीमित न रहकर शरीर की मूल नियामक प्रक्रियाओं को संतुलित करने में मदद करता है।

निमहांस के इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग से जुड़े सुद्धला गौथम ने कहा, “इस अध्ययन में योग ने मापने योग्य स्वायत्त और क्लिनिकल सुधारों के जरिए ओपिओइड विदड्रॉल रिकवरी को स्पष्ट रूप से बेहतर बनाया, जो इसे न्यूरोबायोलॉजिकल आधार वाले हस्तक्षेप के रूप में उपचार प्रोटोकॉल में शामिल करने का समर्थन करता है।”

ओपिओइड यूज डिसऑर्डर (OUD) एक गंभीर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें बार-बार ओपिओइड का सेवन शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर समस्याएं पैदा करता है।

वर्ष 2022 में दुनियाभर में अनुमानित 6 करोड़ लोगों ने गैर-चिकित्सकीय रूप से ओपिओइड का इस्तेमाल किया, लेकिन इनमें से केवल 11 में से 1 व्यक्ति को ही उपचार मिल पाया। भारत में 2019 के एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, ओपिओइड उपयोग की व्यापकता 2.1 प्रतिशत थी।

ओपिओइड विदड्रॉल के दौरान सिम्पैथेटिक गतिविधि बढ़ जाती है और पैरासिम्पैथेटिक टोन कम हो जाता है, जिसे मानक दवाइयां पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पातीं। यही कारण है कि दोबारा लत लगने का खतरा बना रहता है।

योग को सहायक उपचार के रूप में परखने के लिए शोधकर्ताओं ने 59 पुरुष प्रतिभागियों पर एक रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल किया, जिनमें 30 को योग के साथ बुप्रेनोर्फिन उपचार दिया गया, जबकि 29 प्रतिभागी नियंत्रण समूह में थे।

अध्ययन में पाया गया कि योग करने वाले प्रतिभागियों में विदड्रॉल स्थिरीकरण की प्रक्रिया नियंत्रण समूह की तुलना में 4.4 गुना तेज रही। साथ ही, उनमें हार्ट रेट वैरिएबिलिटी, चिंता, नींद और दर्द से जुड़े मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया।

शोध पत्र में टीम ने लिखा, “इस रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल में सहायक योग थेरेपी ने ओपिओइड विदड्रॉल रिकवरी को तेजी से आगे बढ़ाया और स्वायत्त असंतुलन को भी सुधारा। शारीरिक, मानसिक और लक्षणात्मक स्तर पर एकसाथ हुए सुधार यह संकेत देते हैं कि योग केवल लक्षणों से आगे बढ़कर शरीर की मूल नियामक प्रक्रियाओं को बहाल कर सकता है।”

शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि पैरासिम्पैथेटिक तंत्र की बहाली को लक्षित कर योग, ओपिओइड यूज डिसऑर्डर के मानक उपचार में एक अहम कमी को पूरा कर सकता है और इसके आर्थिक लाभ भी हो सकते हैं।

यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल *जामा साइकियाट्री* में प्रकाशित हुआ है।

--आईएएनएस