अध्ययन में खुलासा: महिलाएं और बुजुर्गों में वैक्सीन हिचकिचाहट की संभावना अधिकBy Admin Tue, 13 January 2026 07:29 AM

नई दिल्ली - एक अध्ययन के अनुसार महिलाओं और बुजुर्गों में वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट (वैक्सीन हेजिटेंसी) की संभावना अधिक पाई गई है। मंगलवार को सामने आए इस अध्ययन में 11 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

द लैंसेट में प्रकाशित इस शोध में कोविड-19 वैक्सीन लेने के आंकड़ों के आधार पर वैक्सीन हिचकिचाहट का आकलन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि वैक्सीन को लेकर संकोच का मुख्य कारण उसकी प्रभावशीलता से जुड़ी चिंताएं थीं। समय के साथ इसमें कमी जरूर आई, लेकिन कुछ लोगों में यह अब भी बनी हुई है।

ब्रिटेन के इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पाया कि बुजुर्गों, महिलाओं, बेरोजगारों, सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, पहले कोविड संक्रमित रह चुके व्यक्तियों और कम शिक्षा स्तर वाले लोगों में बिना टीकाकरण के रहने की संभावना अधिक थी।

शोधकर्ताओं ने वैक्सीन हिचकिचाहट को आठ श्रेणियों में बांटा, जिनमें प्रभावशीलता और दुष्प्रभाव को लेकर चिंता, कोविड से कम जोखिम की धारणा, वैक्सीन निर्माताओं पर अविश्वास, तथा वैक्सीन और उससे होने वाली प्रतिक्रियाओं का डर शामिल है।

अध्ययन के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह कहने की संभावना कम थी कि कोविड उनके लिए व्यक्तिगत खतरा नहीं है (पुरुष 18 प्रतिशत, महिलाएं 10 प्रतिशत)। वहीं महिलाएं प्रजनन क्षमता पर संभावित प्रभाव को लेकर अधिक चिंतित पाई गईं (21 प्रतिशत बनाम 8 प्रतिशत)। 74 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग 18–24 वर्ष आयु वर्ग की तुलना में सामान्य रूप से वैक्सीन के विरोध में अधिक पाए गए (12 प्रतिशत बनाम 2.5 प्रतिशत)।

40 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता जताई, 39 प्रतिशत ने कहा कि वे यह देखने के लिए इंतजार करना चाहते थे कि वैक्सीन कितनी प्रभावी है, जबकि 37 प्रतिशत ने दुष्प्रभावों को लेकर आशंका व्यक्त की।

अध्ययन की सह-लेखिका प्रोफेसर हेलेन वार्ड ने कहा, “हमने पाया कि कुछ प्रकार की वैक्सीन हिचकिचाहट को अन्य की तुलना में आसानी से दूर किया जा सकता है, जैसे गर्भावस्था या स्तनपान से जुड़ी चिंताएं।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे अध्ययन से संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे वैक्सीन का वितरण हुआ, सार्वजनिक विश्वास बढ़ा और शुरुआती वैक्सीन संदेह काफी हद तक दूर हो गया।”

यह अध्ययन इंग्लैंड में जनवरी 2021 से मार्च 2022 के बीच कोविड महामारी के दौरान 11 लाख से अधिक लोगों पर किया गया। कुल मिलाकर 3.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी न किसी स्तर की वैक्सीन हिचकिचाहट की सूचना दी।

जनवरी 2021 में यह दर 8 प्रतिशत थी, जो 2022 की शुरुआत में घटकर 1.1 प्रतिशत रह गई। हालांकि ओमिक्रॉन लहर के दौरान फरवरी और मार्च 2022 में इसमें हल्की बढ़ोतरी होकर यह 2.2 प्रतिशत से अधिक हो गई।

—आईएएनएस