उत्सर्जन घटाने और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए एथनॉल ईंधन की संभावनाएं तलाश रही है मेर्स्कBy Admin Wed, 14 January 2026 03:03 AM

नई दिल्ली- वैश्विक शिपिंग कंपनी मेर्स्क कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ईंधनों के लिए चीन पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से एथनॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में अपनाने की संभावनाएं तलाश रही है।

फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में मेर्स्क के सीईओ विंसेंट क्लर्क ने कहा कि कंपनी एथनॉल को एक विकल्प के तौर पर देख रही है, क्योंकि इसका उत्पादन दुनिया के कई देशों में अपेक्षाकृत समान रूप से फैला हुआ है।

उन्होंने बताया कि जहां ग्रीन मेथनॉल जैसे ईंधनों के बाजार पर चीन का दबदबा है, वहीं एथनॉल के सबसे बड़े उत्पादक देश अमेरिका और ब्राजील हैं।

क्लर्क के अनुसार, हरित ईंधनों की संतुलित वैश्विक आपूर्ति ऊर्जा संक्रमण को लेकर व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन बनाने में मदद कर सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि ग्रीन फ्यूल्स के आर्थिक लाभ केवल एक ही देश तक सीमित रहते हैं, तो अन्य देश इस बदलाव का विरोध कर सकते हैं। लेकिन अगर अधिक देशों को इसमें आर्थिक अवसर नजर आते हैं, तो वे डीकार्बनाइजेशन प्रयासों का समर्थन करने के लिए अधिक इच्छुक होंगे।

वैश्विक शिपिंग उद्योग के सामने उत्सर्जन घटाने की बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसके लिए या तो मौजूदा जहाजों में महंगे तकनीकी बदलाव करने पड़ते हैं या फिर ऐसे नए जहाज बनाने होते हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा से बने वैकल्पिक ईंधनों (ई-फ्यूल्स) पर चल सकें।

इन बदलावों में भारी लागत और दीर्घकालिक निवेश शामिल हैं। मेर्स्क स्वच्छ शिपिंग समाधानों को आगे बढ़ाने वाली अग्रणी कंपनियों में शामिल रही है।

डेनमार्क की इस कंपनी ने 2040 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए मेथनॉल से चलने वाले जहाजों में पहले ही बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

इसके साथ ही मेर्स्क पारंपरिक कंटेनर शिपिंग से आगे बढ़कर एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स में भी विस्तार कर रही है, जिसमें बंदरगाह, वेयरहाउसिंग, ट्रकिंग और एयर फ्रेट सेवाएं शामिल हैं।

इस बीच, अन्य शिपिंग कंपनियां भी उत्सर्जन कम करने की दिशा में कदम उठा रही हैं। पिछले साल के अंत में हैपाग-लॉयड और नॉर्थ सी कंटेनर लाइन ने एक टेंडर जीता, जिसके तहत वे 2027 से कम से कम तीन वर्षों तक हाइड्रोजन से बने कम-उत्सर्जन ईंधनों का उपयोग कंटेनर जहाजों में करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य शिपिंग संचालन से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को बड़े पैमाने पर कम करना है।

 

With inputs from IANS