अध्ययन: बचपन के टीकों से मिर्गी का खतरा नहीं बढ़ताBy Admin Sat, 24 January 2026 07:24 AM

नई दिल्ली। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि नियमित बचपन के टीकाकरण से छोटे बच्चों में मिर्गी (एपिलेप्सी) का खतरा नहीं बढ़ता।

‘द जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक्स’ में प्रकाशित इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि टीकों में सहायक पदार्थ (एडजुवेंट) के रूप में उपयोग होने वाला एल्युमिनियम भी इस न्यूरोलॉजिकल बीमारी के जोखिम को नहीं बढ़ाता।

शोधकर्ताओं ने कहा, “चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अद्यतन टीकाकरण स्थिति या टीकों से होने वाले कुल एल्युमिनियम संपर्क का मिर्गी की घटनाओं से कोई संबंध नहीं पाया गया।”

अध्ययन में एक से चार वर्ष से कम उम्र के 2,089 ऐसे बच्चों को शामिल किया गया, जिनमें मिर्गी का निदान हुआ था। इनकी तुलना समान आयु, लिंग और स्वास्थ्य सेवा केंद्र के आधार पर 20,139 ऐसे बच्चों से की गई, जिन्हें मिर्गी नहीं थी।

अध्ययन में शामिल अधिकांश बच्चे लड़के थे (54 प्रतिशत) और उनकी आयु एक वर्ष से 23 महीने के बीच थी (69 प्रतिशत)। शोधकर्ताओं के अनुसार, निर्धारित बचपन के टीकाकरण कार्यक्रम के पालन से मिर्गी का कोई अतिरिक्त खतरा सामने नहीं आया।

टीकों के प्रभाव का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने नियमित बचपन के टीकाकरण कार्यक्रम और टीकों में प्रयुक्त एल्युमिनियम एडजुवेंट्स से होने वाले कुल एल्युमिनियम संपर्क (मिलीग्राम में) का विश्लेषण किया।

टीकों में आमतौर पर एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड, अमोर्फस एल्युमिनियम हाइड्रॉक्सीफॉस्फेट सल्फेट, एल्युमिनियम फॉस्फेट, एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड व एल्युमिनियम फॉस्फेट का संयोजन, और एल्युमिनियम पोटैशियम सल्फेट जैसे एल्युमिनियम लवण एडजुवेंट्स के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। ये प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को मजबूत करने में सहायक होते हैं, हालांकि उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई जाती रही हैं।

हालांकि, अध्ययन में यह पाया गया कि इन दोनों ही मानकों का मिर्गी के बढ़े हुए जोखिम से कोई संबंध नहीं है। शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन बच्चों में पहले से मिर्गी के जोखिम कारक मौजूद थे—जैसे समय से पहले जन्म, पारिवारिक इतिहास या अन्य न्यूरोलॉजिकल अथवा चिकित्सीय समस्याएं—उनमें मिर्गी होने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक पाई गई।

उप-समूह विश्लेषण में यह संकेत मिला कि बहुत कम उम्र (एक से दो महीने) के उन शिशुओं में, जिन्हें एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड और एल्युमिनियम फॉस्फेट के संयोजन वाले टीके दिए गए थे, मिर्गी के निदान की संभावना लगभग दोगुनी दिखी। हालांकि, यह आंकड़ा सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण स्तर तक नहीं पहुंच सका।

शोधकर्ताओं ने कहा, “कुल मिलाकर यह अध्ययन ऐसे समय में बचपन के टीकाकरण कार्यक्रम की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त भरोसा देता है, जब कुछ समुदायों में टीकाकरण कवरेज घटा है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि “ये निष्कर्ष स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को उन माता-पिता से संवाद करने में मदद कर सकते हैं, जो टीकों से मिर्गी के संभावित जोखिम को लेकर चिंतित हैं।”

 

With inputs from IANS