
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के लिए देश में निर्मित आधुनिक लिंक-हॉफमैन-बुश (एलएचबी) कोचों की संख्या 2014-25 के दौरान 18 गुना से अधिक बढ़कर 42,677 हो गई है, जबकि 2004 से 2014 के बीच देश में ऐसे केवल 2,337 कोच बनाए गए थे। यह जानकारी बुधवार को संसद में दी गई।
लिंक-हॉफमैन-बुश (एलएचबी) कोच आधुनिक स्टेनलेस स्टील से बने यात्री कोच हैं, जिन्हें जर्मन तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है। इन्हें 160 से 200 किमी प्रति घंटे की उच्च गति के लिए डिजाइन किया गया है। ये पुराने आईसीएफ कोचों की तुलना में बेहतर सुरक्षा और यात्री सुविधा प्रदान करते हैं। इनमें दुर्घटना के दौरान कोच के पलटने से बचाने के लिए एंटी-टेलीस्कोपिक तकनीक और प्रभावी ब्रेकिंग के लिए डिस्क ब्रेक जैसी सुविधाएं होती हैं।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वर्तमान में रेल मंत्रालय के अंतर्गत देश में तीन कोच निर्माण इकाइयां कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि कोच निर्माण इकाइयों के विकास की लागत स्थान, प्रस्तावित कोचों के प्रकार, उत्पादन क्षमता और लगाए जाने वाले संयंत्र व मशीनरी जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
उन्होंने बताया कि कोच निर्माण इकाइयों के विकास पर होने वाला खर्च लंबे समय तक और कई चरणों में किया जाता है। इसमें इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ समय-समय पर सुविधाओं के उन्नयन और विस्तार का कार्य भी शामिल होता है। उदाहरण के तौर पर, नवीनतम कोच निर्माण इकाई मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली की स्थापना पर 3,042.83 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इसके अलावा, चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री और रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री समेत तीनों इकाइयों के उन्नयन और विस्तार से जुड़े विभिन्न परियोजनाओं के लिए 2,443 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
रेल मंत्री ने कहा कि पुराने आईसीएफ कोचों को हटाकर अधिक सुरक्षित और आधुनिक एलएचबी कोचों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जा रहा है। तकनीकी रूप से उन्नत एलएचबी कोच बेहतर सफर अनुभव, आकर्षक डिजाइन और हल्के वजन, एंटी-क्लाइम्बिंग फीचर, सेकेंडरी एयर सस्पेंशन, स्टेनलेस स्टील बॉडी और डिस्क ब्रेक सिस्टम जैसी सुविधाओं से लैस होते हैं।
Witth inputs from IANS